Meaning of

सज्दे

sajde • سجدے

सजदा; उपासना; समर्पण

prostrations; acts of worship; submission

سجدہ; عبادت; اطاعت

Arabic

अमीरों ने हमारे शहर में मस्जिद बनाई है
गरीबों ने किए सजदे अरे क्या बे हयाई है

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मौत वो है जो आए सजदे में
ज़िन्दगी वो जो बंदगी हो जाए

क्या कहूँ आप कितने प्यारे हैं
इतने प्यारे कि प्यार ही हो जाए

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ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता
मैं जब तक घर न लौटूँ मेरी माँ सज्दे में रहती है

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ये सारा जिस्म झुक कर बोझ से दोहरा हुआ होगा
मैं सजदे में नहीं था आप को धोखा हुआ होगा

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ज़मीं मेरे सज्दे से थर्रा गई
मुझे आसमाँ से पुकारा गया

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ये इक रोज़ बिछड़ जाने का डर मौला
डाल गया है मेरे मन में घर मौला

या तो उस को लिख मेरी क़िस्मत में तू
या फिर मेरे सजदे वापस कर मौला

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ये बात तुम बस कह दो ये पल ठहर जाए
मैं सज्दे में झुकता हूँ फिर उठ न सर पाए

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मैं ने उस सज्दे का वो मंज़र घटते देखा है
तेरी राहों से पत्थर को ख़ुद हटते देखा है

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इबलीस जैसे सज्दे अदा कर के रात दिन
चाहत शजर के दिल में हैं देखो बहिश्त की

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रफ़्ता-रफ़्ता सब कुछ खोने को बैठा हूँ
क्यूँँ चाहत में पागल होने को बैठा हूँ

ना आया था साथी मेरा, ना आएगा
सजदे में, राहों पर रोने को बैठा हूँ

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अमीरों ने हमारे शहर में मस्जिद बनाई है
गरीबों ने किए सजदे अरे क्या बे हयाई है

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मौत वो है जो आए सजदे में
ज़िन्दगी वो जो बंदगी हो जाए

क्या कहूँ आप कितने प्यारे हैं
इतने प्यारे कि प्यार ही हो जाए

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'सज्दे' श्रद्धा में झुकने की क्रिया को दर्शाता है, जो विनम्रता और भक्ति का संकेत है। कविता में, यह अक्सर प्रेम या दिव्य इच्छा के प्रति अंतिम समर्पण का प्रतीक होता है, जहाँ आत्मा समर्पित होती है।

कवि 'सज्दे' का उपयोग भक्ति और समर्पण के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह व्यक्ति के प्रेम या विश्वास की गहराई को दर्शा सकता है, जो अक्सर गर्व या अहंकार के विपरीत होता है।

कविता के क्षेत्र में, 'सज्दे' आत्मा के सबसे गहरे भक्ति के कार्यों का रूपक बन जाता है।