Meaning of

सब्र-ओ-क़रार

sabr-o-qaraar • صبر و قرار

धैर्य और स्थिरता; सहनशीलता और शांति

patience and composure; endurance and tranquility

صبر اور قرار; برداشت اور سکون

Arabic

ऐ रब तू कहीं तो बस्ता मंदिर में है तो मस्जिद में भी ये माया है या जादू है कि तुझे भी सब्र-ओ-क़रार नहीं — Sanjay Bhat

'सब्र-ओ-क़रार' वाक्यांश एक शांत सहनशीलता की स्थिति को दर्शाता है। मूल रूप से, यह कठिनाइयों को गरिमा के साथ सहन करने की शक्ति का प्रतीक है। कविता में, यह अक्सर अराजकता के बीच पाए जाने वाले आंतरिक शांति को दर्शाता है, जीवन की परीक्षाओं की एक शांत स्वीकृति।

कवि 'सब्र-ओ-क़रार' का उपयोग विपरीत परिस्थितियों में धैर्य के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह उन पात्रों की शांत शक्ति को चित्रित कर सकता है जो गरिमा के साथ जीवन के तूफानों का सामना करते हैं। इस वाक्यांश को अक्सर उथल-पुथल के साथ रखा जाता है, जो आंतरिक शांति और बाहरी अराजकता के बीच के विपरीत को उजागर करता है।

काव्यात्मक परिदृश्यों में, 'सब्र-ओ-क़रार' स्थायी आत्मा का प्रमाण है। यह उस शांति की कोमल याद दिलाता है जो भीतर पाई जा सकती है।