ये अश्क-ओ-दर्द ये सब्र-ओ-क़रार खो दूँगामैं तेरे हिज्र की लज़्ज़त भी यार खो दूँगारहे ये सब्र सलामत मुझे तो डर ये हैमैं तुझ को पा के तेरा इंतिज़ार खो दूँगा— Wajid Husain Sahil