Meaning of

समर्पण

samarpan • سمرپن

समर्पण; आत्मसमर्पण; अर्पण

dedication; surrender; offering

وقف; سپردگی; نذر

Sanskrit

भाव समर्पन और मुहब्बत देखी ही नइँ तुम ने बदन से आगे औरत देखी ही नइँ — Mukesh Guniwal "MAhir"

समर्पण का मूल भाव आत्मा की पूर्ण अर्पणता है, चाहे वह किसी उद्देश्य के लिए हो, किसी व्यक्ति के लिए, या किसी उच्च शक्ति के लिए। कविता में, यह शब्द आत्मा और भावना के स्तर पर गहराई से जुड़ता है, जहाँ समर्पण प्रेम या भक्ति की गहन अभिव्यक्ति बन जाता है।

कवियों द्वारा 'समर्पण' का प्रयोग अक्सर प्रेम और भक्ति के विषयों की खोज के लिए किया जाता है। यह प्रेम के अंतिम कार्य को दर्शा सकता है, जहाँ व्यक्ति अपने प्रिय में खो जाता है। यह 'त्याग' जैसे शब्दों के विपरीत है, जो बिना आत्मसमर्पण की भावनात्मक गहराई के त्याग को दर्शाते हैं।

कविता के क्षेत्र में, 'समर्पण' स्वयं और दूसरे के बीच एक सेतु बन जाता है, जो स्वयं को पूरी तरह से अर्पित करने की शक्ति का प्रमाण है।