साज़ ख़ामोश कि इक टूटते संगीत के नामप्यार में हम ने किए गीत समर्पन कितनेतौबा ये तमकनत-ए-हुस्न इलाही तौबाएक श्रृंगार को तोड़े गए दर्पन कितने— Shashank Shekhar Pathak