Meaning of

सयाह

sayaah • سیاہ

काला; अंधकारमय

black; dark

کالا; تاریک

Arabic

सियाह रात नहीं लेती नाम ढलने का यही तो वक़्त है सूरज तिरे निकलने का — Shahryar
मान जाती मुस्कुराहट से ही मैं वो सियाही ख़त में ज़ाया' करता था — Parul Singh "Noor"
शब पिघलेगी लम्हा-लम्हा, गहराएगी और सियाही रौशन रखना यादें सारी, वस्ल बुझे तो हिज्र जलाना — Saurabh Mehta 'Alfaaz'
अगर मौका मिला तो एक दिन अख़बार देखेंगे सियाही में है कितनी झूठ की मिक़दार, देखेंगे — Prashant Sitapuri
मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा — Ameer Qazalbash
सुतून-ए-दार पे रखते चलो सरों के चराग़ जहाँ तलक ये सितम की सियाह रात चले — Majrooh Sultanpuri
करवट-करवट घूँट-घूँट भर, स्याह रात गुज़री ऐसे नींद किसी ने तह कर के, अलमारी में रख दी जैसे — Saurabh Mehta 'Alfaaz'
माज़ी इक लंबी सियाह परछाई है मुस्तकबिल में दूर तलक तन्हाई है — Pawan Kumar

'सयाह' शब्द काले रंग या अंधकार की भावना को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर रहस्य, गहराई और अज्ञात का प्रतीक होता है। यह उदासी या रात की गहन चुप्पी की भावनाओं को जागृत कर सकता है।

कवि 'सयाह' का उपयोग रहस्य और आत्मनिरीक्षण के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह आत्मा की अज्ञात गहराइयों या बिना चाँद की रात की गंभीर सुंदरता का प्रतिनिधित्व कर सकता है।

काव्यिक दुनिया में, 'सयाह' अज्ञात के आकर्षण को समेटे हुए है। यह हमें अंधकार में छिपी सुंदरता को अपनाने के लिए आमंत्रित करता है।