Meaning of

साक़

saaq • ساق

पैर; जांघ; सहारा

leg; thigh; support

ٹانگ; ران; سہارا

Arabic

मुझे ये फ़िक्र सब की प्यास अपनी प्यास है साक़ी
तुझे ये ज़िद कि ख़ाली है मिरा पैमाना बरसों से

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नशा पिला के गिराना तो सब को आता है
मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी

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ता'रीफ़ सुन रहा हूँ बहुत तेरे हाथ की
साक़ी मेरे लिए भी ज़रा सी निकाल दे

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ग़ुरूर-ए-लुत्फ़-ए-साक़ी नश्शा-ए-बे-बाकी-ए-मस्ताँ
नम-ए-दामान-ए-इस्याँ है तरावत मौज-ए-कौसर की

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वो गुल-फ़रोश कहाँ अब गुलाब किस से लूँ
नहीं रहा मिरा साक़ी शराब किस से लूँ

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अलग बैठे थे फिर भी आँख साक़ी की पड़ी हम पर
अगर है तिश्नगी कामिल तो पैमाने भी आएँगे

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बोसे अपने आरिज़-ए-गुलफ़ाम के
ला मुझे दे दे तिरे किस काम के

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आता है जी में साक़ी-ए-मह-वश पे बार बार
लब चूम लूँ तिरा लब-ए-पैमाना छोड़ कर

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फ़रेब-ए-साक़ी-ए-महफ़िल न पूछिए 'मजरूह'
शराब एक है बदले हुए हैं पैमाने

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बढ़ाई मय जो मोहब्बत से आज साक़ी ने
ये काँपे हाथ कि साग़र भी हम उठा न सके

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मुझे ये फ़िक्र सब की प्यास अपनी प्यास है साक़ी
तुझे ये ज़िद कि ख़ाली है मिरा पैमाना बरसों से

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नशा पिला के गिराना तो सब को आता है
मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी

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'साक़' शब्द शक्ति और सहारे की छवि प्रस्तुत करता है, अक्सर उस नींव का प्रतीक होता है जिस पर कुछ खड़ा होता है। कविता में, यह प्रिय की दृढ़ता या सुंदरता की स्थायित्व का प्रतिनिधित्व कर सकता है।

कवि 'साक़' का उपयोग अटल समर्थन के विचार को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रिय की उपस्थिति का रूपक हो सकता है। यह नाजुकता के विपरीत, दृढ़ता पर जोर देता है।

काव्यिक क्षेत्र में, 'साक़' स्थायी शक्ति और अटल समर्थन का प्रमाण है।