Meaning of

साहब-ए-किरदार

saahib-e-kirdaar • اڑا

चरित्रवान व्यक्ति; ईमानदारी

person of character; integrity

کردار والا شخص; دیانتداری

Persian

परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है — Shakeel Azmi
बहुत मज़ाक़ उड़ाते हो तुम ग़रीबों का मदद तो करते हो तस्वीर खींच लेते हो — Nawaz Deobandi
सदाएँ देते हुए और ख़ाक उड़ाते हुए मैं अपने आप से गुज़रा हूँ तुझ तक आते हुए — Rehman Faris
तुम सोच रहे हो बस, बादल की उड़ानों तक मेरी तो निगाहें हैं सूरज के ठिकानों तक — Aalok Shrivastav
वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से वो और थे जो हार गए आसमान से — Faheem Jogapuri
कहाँ तो ख़ाक उड़ाता था मुस्कुराता था मुझ ऐसे शख़्स को भी क्या से क्या बनाया गया — Vivek Bijnori
परिंद शाख़ पे तन्हा उदास बैठा है उड़ान भूल गया मुद्दतों की बंदिश में — Khaleel Tanveer
तुम्हें पता है जिन्हें तुम ख़ुदा समझते हो तुम्हारे सोचने और बोलने से डरते हैं — Balmohan Pandey

'साहब-ए-किरदार' उस व्यक्ति को संदर्भित करता है जो मजबूत नैतिक सिद्धांतों और ईमानदारी का धनी होता है। कविता में, यह अक्सर आदर्श मानव का प्रतीक होता है, जो अपने विश्वासों और मूल्यों में दृढ़ रहता है।

कवि 'साहब-ए-किरदार' का उपयोग दृढ़ता और नैतिक शक्ति के गुणों को उजागर करने के लिए करते हैं। यह अक्सर उन पात्रों के विपरीत होता है जिनमें ईमानदारी की कमी होती है, सच्चे चरित्र की महानता को उजागर करता है।

'साहब-ए-किरदार' ईमानदारी का एक प्रकाशस्तंभ है, चरित्र की शक्ति को एक काव्यात्मक श्रद्धांजलि।