Meaning of

साक़ी

saaqi • ساقی

प्याला भरने वाला; शराब परोसने वाला

cupbearer; wine server

ساقی; شراب پیش کرنے والا

Arabic

नशा पिला के गिराना तो सब को आता है मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी — Allama Iqbal
ग़ुरूर-ए-लुत्फ़-ए-साक़ी नश्शा-ए-बे-बाकी-ए-मस्ताँ नम-ए-दामान-ए-इस्याँ है तरावत मौज-ए-कौसर की — Mirza Ghalib
अलग बैठे थे फिर भी आँख साक़ी की पड़ी हम पर अगर है तिश्नगी कामिल तो पैमाने भी आएँगे — Majrooh Sultanpuri
आता है जी में साक़ी-ए-मह-वश पे बार बार लब चूम लूँ तिरा लब-ए-पैमाना छोड़ कर — Jaleel Manikpuri
बढ़ाई मय जो मोहब्बत से आज साक़ी ने ये काँपे हाथ कि साग़र भी हम उठा न सके — Majrooh Sultanpuri
ता'रीफ़ सुन रहा हूँ बहुत तेरे हाथ की साक़ी मेरे लिए भी ज़रा सी निकाल दे — Shadab Javed
वो गुल-फ़रोश कहाँ अब गुलाब किस से लूँ नहीं रहा मिरा साक़ी शराब किस से लूँ — Anwar Shaoor
बोसे अपने आरिज़-ए-गुलफ़ाम के ला मुझे दे दे तिरे किस काम के — Muztar Khairabadi
फ़रेब-ए-साक़ी-ए-महफ़िल न पूछिए 'मजरूह' शराब एक है बदले हुए हैं पैमाने — Majrooh Sultanpuri
मुझे ये फ़िक्र सब की प्यास अपनी प्यास है साक़ी तुझे ये ज़िद कि ख़ाली है मिरा पैमाना बरसों से — Majrooh Sultanpuri

साक़ी आनंद और नशे का वाहक है, एक ऐसा व्यक्ति जो केवल शराब ही नहीं बल्कि परमानंद और मुक्ति का सार परोसता है। कविता में, साक़ी दिव्य या सांसारिक सुख का प्रतीक बन जाता है।

कवियों द्वारा साक़ी का उपयोग प्रेम, नशा और आध्यात्मिक जागृति के विषयों की खोज के लिए किया जाता है। यह संयम को त्यागने और अनुभव की पूर्णता को अपनाने का आह्वान है।

साक़ी भोग की प्रेरणा है, जीवन के नशीले आकर्षण का एक शाश्वत प्रतीक।