Meaning of

सुकूँ-ए-दिल

sukoon-e-dil • اٹھائی

दिल की शांति; आत्मा की शांति

peace of heart; tranquility of the soul

دل کا سکون; روح کی سکونت

Persian

तुम अपने लहजे पे थोड़ा सा इख़्तियार रखो
वगरना लोग उठाएँगे परवरिश पे सवाल

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तू तो फिर अपनी जान है तेरा तो ज़िक्र क्या
हम तेरे दोस्तों के भी नख़रे उठाएँगे

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उस ने मेरे छोटेपन की इस तरह इज़्ज़त रखी
मैं ने दीवारें उठाईं उस ने उन पर छत रखी

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मुझ को ये आरज़ू वो उठाएँ नक़ाब ख़ुद
उन को ये इंतिज़ार तक़ाज़ा करे कोई

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वफ़ा तुम से करेंगे दुख सहेंगे नाज़ उठाएँगे
जिसे आता है दिल देना उसे हर काम आता है

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हम को न मिल सका तो फ़क़त इक सुकून-ए-दिल
ऐ ज़िंदगी वगरना ज़माने में क्या न था

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मैं ने जन्नत की झलक देख ली उन आँखों में
उस ने नज़रें थी उठाई मिरी और पल भर को

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छोड़ कर हम सुकून-ए-दिल अपना
चल पड़े फिर से शोर की जानिब

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सपने गए सुकून भी उल्फ़त चली गई
मिलने की अपने आप से फ़ुर्सत चली गई

मेरी तो बोलने की ही आदत चली गई
तेरे ही साथ सारी शरारत चली गई

खुशियांँ थीं उस सेे घर में थीं आंँगन में रौनकें
बिटिया के साथ घर की भी बरकत चली गई

छूटा तुम्हारा साथ तो बाक़ी ही क्या बचा
दिल में जो पल रही थी वो हसरत चली गई

आते नहीं फ़क़ीर न साइल भी आजकल
माँ क्या गई कि घर की रिवायत चली गई

मेरे सुख़न पे तू ने उठाईं जो उँगलियाँ
मेरी तमाम उम्र की मेहनत चली गई

यूँँंँ भी कभी जहान में इफ़रात में न थी
थोड़ी बहुत थी वो भी सदाक़त चली गई

होती नहीं है शे'र की आमद भी अब नज़र
तुम क्या गए कि लफ़्ज़ की ताक़त चली गई

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भले हर-पल तिरे इस नूर का एहसास हो लेकिन
सुकून-ए-दिल तिरे दीदार के बिन आ नहीं सकता

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तुम अपने लहजे पे थोड़ा सा इख़्तियार रखो
वगरना लोग उठाएँगे परवरिश पे सवाल

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तू तो फिर अपनी जान है तेरा तो ज़िक्र क्या
हम तेरे दोस्तों के भी नख़रे उठाएँगे

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अपने मूल अर्थ में, 'सुकूँ-ए-दिल' हृदय के भीतर निवास करने वाली गहरी आंतरिक शांति को संदर्भित करता है। कविता ने इस शब्द को भावनात्मक शांति की गहराई का पता लगाने के लिए अपनाया है, अक्सर इसे बाहरी दुनिया के अराजकता के विपरीत प्रस्तुत किया जाता है। यह शांत परिदृश्यों और आत्मनिरीक्षण के क्षणों में पाई जाने वाली शांति की छवियों को उभारता है।

'सुकूँ-ए-दिल' का उपयोग कवि अक्सर प्रेम या आध्यात्मिक पूर्ति में पाए जाने वाले अंतिम सांत्वना को चित्रित करने के लिए करते हैं। इसे उथल-पुथल के साथ विपरीत किया जाता है, जो शांति की ओर दिल की यात्रा को उजागर करता है। इस शब्द का उपयोग मासूमियत या सरल समय की वापसी की लालसा को व्यक्त करने के लिए भी किया जाता है।

सुकूँ-ए-दिल जीवन की अराजकता के बीच शांति की हृदय की अनंत खोज का प्रतीक है। यह आंतरिक सद्भाव का एक शाश्वत प्रतीक बना रहता है।