Meaning of

सुकूँ-ए-दिल

sukoon-e-dil • اٹھائی

दिल की शांति; आत्मा की शांति

peace of heart; tranquility of the soul

دل کا سکون; روح کی سکونت

Persian

तू तो फिर अपनी जान है तेरा तो ज़िक्र क्या हम तेरे दोस्तों के भी नख़रे उठाएँगे — Ali Zaryoun
मुझ को ये आरज़ू वो उठाएँ नक़ाब ख़ुद उन को ये इंतिज़ार तक़ाज़ा करे कोई — Asrar Ul Haq Majaz
हम को न मिल सका तो फ़क़त इक सुकून-ए-दिल ऐ ज़िंदगी वगरना ज़माने में क्या न था — Azad Ansari
छोड़ कर हम सुकून-ए-दिल अपना चल पड़े फिर से शोर की जानिब — Irshad 'Arsh'
भले हर-पल तिरे इस नूर का एहसास हो लेकिन सुकून-ए-दिल तिरे दीदार के बिन आ नहीं सकता — Rohit Asthana Prabhav
उस ने मेरे छोटेपन की इस तरह इज़्ज़त रखी मैं ने दीवारें उठाईं उस ने उन पर छत रखी — Kunwar Bechain
वफ़ा तुम से करेंगे दुख सहेंगे नाज़ उठाएँगे जिसे आता है दिल देना उसे हर काम आता है — Arzoo Lakhnavi
मैं ने जन्नत की झलक देख ली उन आँखों में उस ने नज़रें थी उठाई मिरी और पल भर को — arjun chamoli
सपने गए सुकून भी उल्फ़त चली गई मिलने की अपने आप से फ़ुर्सत चली गई मेरी तो बोलने की ही आदत चली गई तेरे ही साथ सारी शरारत चली गई खुशियांँ थीं उस सेे घर में थीं आंँगन में रौनकें बिटिया के साथ घर की भी बरकत चली गई छूटा तुम्हारा साथ तो बाक़ी ही क्या बचा दिल में जो पल रही थी वो हसरत चली गई आते नहीं फ़क़ीर न साइल भी आजकल माँ क्या गई कि घर की रिवायत चली गई मेरे सुख़न पे तू ने उठाईं जो उँगलियाँ मेरी तमाम उम्र की मेहनत चली गई यूँँंँ भी कभी जहान में इफ़रात में न थी थोड़ी बहुत थी वो भी सदाक़त चली गई होती नहीं है शे'र की आमद भी अब नज़र तुम क्या गए कि लफ़्ज़ की ताक़त चली गई — Nazar Dwivedi
तुम अपने लहजे पे थोड़ा सा इख़्तियार रखो वगरना लोग उठाएँगे परवरिश पे सवाल — Mohammad Aquib Khan

अपने मूल अर्थ में, 'सुकूँ-ए-दिल' हृदय के भीतर निवास करने वाली गहरी आंतरिक शांति को संदर्भित करता है। कविता ने इस शब्द को भावनात्मक शांति की गहराई का पता लगाने के लिए अपनाया है, अक्सर इसे बाहरी दुनिया के अराजकता के विपरीत प्रस्तुत किया जाता है। यह शांत परिदृश्यों और आत्मनिरीक्षण के क्षणों में पाई जाने वाली शांति की छवियों को उभारता है।

'सुकूँ-ए-दिल' का उपयोग कवि अक्सर प्रेम या आध्यात्मिक पूर्ति में पाए जाने वाले अंतिम सांत्वना को चित्रित करने के लिए करते हैं। इसे उथल-पुथल के साथ विपरीत किया जाता है, जो शांति की ओर दिल की यात्रा को उजागर करता है। इस शब्द का उपयोग मासूमियत या सरल समय की वापसी की लालसा को व्यक्त करने के लिए भी किया जाता है।

सुकूँ-ए-दिल जीवन की अराजकता के बीच शांति की हृदय की अनंत खोज का प्रतीक है। यह आंतरिक सद्भाव का एक शाश्वत प्रतीक बना रहता है।