Meaning of

सुर्ख़

surkh • سرخ

लाल; चमकीला; दमकता हुआ

red; bright; glowing

سرخ; روشن; چمکتا ہوا

Persian

फूटने वाली है मज़दूर के माथे से किरन सुर्ख़ परचम उफ़ुक़-ए-सुब्ह पे लहराते हैं — Ali Sardar Jafri
महक उठे रंग-ए-सुर्ख़ जैसे खिले चमन में गुलाब इतने — Muneer Niyazi
तुम्हारा नाम जैसे एक मीठे पान का बीड़ा ज़बाँ पे रख लिया है रूह मेरी सुर्ख़ है तब से — Umesh Maurya
सुर्ख़-रू होता है इंसाँ ठोकरें खाने के बा'द रंग लाती है हिना पत्थर पे पिस जाने के बा'द — Syed Gulam Mohammad Mast Kalkattvi
इन लरज़ते लबों से क्यूँँ तू ने सुर्ख़ आँखों को फिर छुआ ही नहीं — Amaan Pathan
बदन का सारा लहू खिंच के आ गया रुख़ पर वो एक बोसा हमें दे के सुर्ख़-रू है बहुत — Zafar Iqbal
किस की होली जश्न-ए-नौ-रोज़ी है आज सुर्ख़ मय से साक़िया दस्तार रंग — Imam Bakhsh Nasikh
मैं थक गया हूँ ख़ुदारा उदासी होते हुए किसी के सुर्ख़ लबों का मुझे तबस्सुम कर — Amaan Haider

मूल रूप से, 'सुर्ख़' चमकीले लाल रंग को दर्शाता है, एक ऐसा रंग जो ध्यान आकर्षित करता है और जुनून का प्रतीक है। कविता में, यह रंग उन भावनाओं के लिए रूपक बन जाता है जो प्रबलता से जलती हैं, चाहे वह प्रेम हो, क्रोध हो, या क्रांति। यह जीवन और तीव्रता का रंग है।

कवि 'सुर्ख़' का उपयोग उन भावनाओं को व्यक्त करने के लिए करते हैं जो तीव्र और सर्वग्राही होती हैं। यह प्रेमी के गाल की लाली, क्रांतिकारी भावना की तीव्रता, या भीतर जलते क्रोध का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द ठंडे रंगों के विपरीत है, जो भावना की गर्मी को उजागर करता है।

'सुर्ख़' शब्द भावनाओं की अग्निमय सार को समेटे हुए है, जीवन के प्रबल रंगों की एक जीवंत याद दिलाता है।