जो कह रही हो तुम ये अपनी बात आख़िरीलगने लगी है मुझ को तो ये रात आख़िरीइस वक़्त ये आँखें मेरी नम भी हैं सुर्ख़ भीइस शहर में होनी है ये बरसात आख़िरी— nakul kumar