Meaning of

सूरत-ए-जानाँ

soorat-e-jaanaan • صورت جاناں

प्रिय का चेहरा; प्रियतम का मुखड़ा

face of the beloved; visage of the dear one

محبوب کا چہرہ; عزیز کا رخسار

Persian

ऐ शौक़-ए-नज़ारा क्या कहिए नज़रों में कोई सूरत ही नहीं ऐ ज़ौक़-ए-तसव्वुर क्या कीजे हम सूरत-ए-जानाँ भूल गए — Asrar Ul Haq Majaz

'सूरत-ए-जानाँ' प्रिय के चेहरे के प्रति प्रेमी की प्रशंसा का सार पकड़ता है। कविता में, यह सुंदरता और लालसा का प्रतीक बन जाता है, जहाँ प्रिय का मुखड़ा प्रेरणा और तड़प का स्रोत होता है।

कवि अक्सर 'सूरत-ए-जानाँ' का उपयोग प्रेमियों के बीच गहरे भावनात्मक संबंध को व्यक्त करने के लिए करते हैं। इसका उपयोग प्रिय की सुंदरता और प्रेमी की भक्ति को उजागर करने के लिए किया जाता है।

कविता में 'सूरत-ए-जानाँ' प्रिय की आकर्षण के लिए एक कालातीत श्रद्धांजलि है। यह हमें प्रेम की शक्ति की याद दिलाता है जो साधारण को असाधारण में बदल देती है।