Meaning of

स्याही

syaahi • سیاہی

स्याही; अंधकार

ink; darkness

سیاہی; تاریکی

Arabic

कुछ धुँधला सा यूँँ दिखता है आईने में जैसे
पन्नों पे सियाही मिरे ज्यूँ फैल गई हो

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मान जाती मुस्कुराहट से ही मैं
वो सियाही ख़त में ज़ाया' करता था

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सारे पेड़ क़लम में बना दूँ और समुंदर रख लूँ स्याही
तब भी न लिख पाऊँगा मैं उस पे , ऐसी है मेरी माई

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शब पिघलेगी लम्हा-लम्हा, गहराएगी और सियाही
रौशन रखना यादें सारी, वस्ल बुझे तो हिज्र जलाना

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अगर मौका मिला तो एक दिन अख़बार देखेंगे
सियाही में है कितनी झूठ की मिक़दार, देखेंगे

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लिख रहा था शे'र जब उस बे-वफ़ा पर
तब सियाही बोली इतनी सस्ती हूँ क्या

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प्रेम राधा प्रेम मोहन है
प्रेम स्याही प्रेम दरपन है

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कभी चल कर रुके होंगे, कभी रुक कर चले होंगे
अदा-ए-ख़ुश-ख़िरामी में वो जाने कब ढले होंगे

सियाही बे-सबब आँखों के साहिल पर नहीं आती
यक़ीनन चश्मे-आतिश में कई आशिक़ जले होंगे

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कोरे काग़ज़ को रखें कोरा ही आप
नाम स्याही बिन लिखें मोरा ही आप

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क़ीमती स्याही भरी जिस जिस क़लम में आँसुओं की
वक़्त पे वो भूल बैठे ये ग़लत ये ठीक सा है

बोलते थे बोल जो ता'रीफ़ में हर रोज़ मेरी
एक दिन वो बोल बैठे आप की ता'रीफ़ क्या है

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कुछ धुँधला सा यूँँ दिखता है आईने में जैसे
पन्नों पे सियाही मिरे ज्यूँ फैल गई हो

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मान जाती मुस्कुराहट से ही मैं
वो सियाही ख़त में ज़ाया' करता था

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स्याही अपने मूल में वह द्रव है जो शब्दों को जीवन देता है, विचारों और भावनाओं को कागज़ पर उतारता है। कविता में, यह अभिव्यक्ति की गहराई और अनकहे भावों की छाया का प्रतीक है।

कवि अक्सर 'स्याही' का उपयोग सृजन और विनाश के विषयों, लिखित शब्द की शक्ति, और गहन विचारों के साथ आने वाले अंधकार की खोज के लिए करते हैं।

स्याही हृदय की स्याही के रूप में बहती है, मानव अनुभव के प्रकाश और छायाओं को पकड़ती है।