क़ीमती स्याही भरी जिस जिस क़लम में आँसुओं कीवक़्त पे वो भूल बैठे ये ग़लत ये ठीक सा हैबोलते थे बोल जो ता'रीफ़ में हर रोज़ मेरीएक दिन वो बोल बैठे आप की ता'रीफ़ क्या है— Anmol Mishra