Meaning of

हद-ए-बीनाई

had-e-beenaai • حد بینائی

दृष्टि की सीमा; देखने की हद

limit of vision; boundary of sight

نظر کی حد; دیکھنے کی حد

Persian

मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में — Anis shah anis

यह वाक्यांश उस सीमा का आभास कराता है जहाँ दृष्टि अज्ञात से मिलती है। कविता में, यह समझ और दृष्टि की सीमाओं का प्रतीक है, जो अक्सर मानव समझ से परे रहस्यों की ओर इशारा करता है।

कवि इसका उपयोग ज्ञान और अज्ञान के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह अक्सर कल्पना की असीम प्रकृति के विपरीत होता है। यह यात्रा या खोज के अंत का भी संकेत दे सकता है।

यह वाक्यांश देखे गए और छिपे हुए के बीच के नाजुक संतुलन को पकड़ता है।