Meaning of

हबीब

habeeb • حبیب

प्रिय; प्रेमी

beloved; dear one

محبوب; پیارا

Arabic

मेरे हबीब तू मेरे नज़दीक चल के आ
मैं चाहती हूँ रूप को अपने बदल के आ

छुप-छुप के ऐसे ख़्वाब में कब तक मिलेगा तू
मिलने कभी तो ख़्वाब से बाहर निकल के आ

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जुदा किसी से किसी का ग़रज़ हबीब न हो
ये दाग़ वो है कि दुश्मन को भी नसीब न हो

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दोस्ती में हो रहे हैं आज जो वादे वफ़ा
ये हबीब इबने मज़ाहिर आप का एहसान है

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ख़ाक बस्तियों में घर रेत के बनाओगे
रोज़ रोज़ ऐसे ही ख़ूब चोट खाओगे

सोचते तो हैं हम भी छत से कूद जाएँ अब
फिर ख़याल आता है तुम कहाँ पे जाओगे

जो हमारे हो कर भी हर किसी को देखोगे
बे-वफ़ा की गिनती में यार आ ही जाओगे

बे-नक़ाब होकर के हम निकल तो आएँगे
हो गया कहीं कुछ भी हमपे टिन-टिनाओगे

शब के आठ बजते ही तुम कहाँ पे जाते हो
कोई पूछ बैठा फिर बोलो क्या बताओगे

जब रक़ीब बनकर ही कुछ नहीं हुआ तुम सेे
तुम हबीब बनकर क्या बस्तियाँ जलाओगे

जब नज़र झुकाओगे बात बन ही जाएगी
प्यार से जो बोलेंगे तुम भी मान जाओगे
इश्क़ का मुहब्बत का जब बुख़ार आएगा
वक़्त पर दवा लेना ख़ुद ही भूल जाओगे

जब कभी भी तन्हाई नोच कर के खाएगी
मेरा नाम लिख कर तुम हाथ पर मिटाओगे

दास्ताँ मोहब्बत की एक बार सुन लोगे
मेरा नाम गीतों में तुम भी गुन-गुनाओगे

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हम ने इलाज-ए-ज़ख़्म की हसरत में ऐ हबीब
ज़ख़्मों को नोच नोच के नासूर कर लिया

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मेरा रकी़ब ही तो मेरा हबीब है अब
मेरे सनम का वो अब चाहत जो हो गया है

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थोड़ी ज़बान कड़वी हक़ीक़त में है मेरी
लेकिन मेरे हबीब मैं दिल का बुरा नहीं

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हबीब साथ दे मेरा
या मेरा साथ छोड़ दे

भरोसा है तो साथ चल
वगरना हाथ छोड़ दे

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इतने तरस गए हैं मोहब्बत को हम हबीब
जिस शख़्स से मिला दो हमें उस से प्यार हो

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पहले मुझ को हबीब कहता था
अब वो मुझ को अजीब कहता है

जो मुझे जान जान कहता था
अब वो मुझ को रक़ीब कहता है

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मेरे हबीब तू मेरे नज़दीक चल के आ
मैं चाहती हूँ रूप को अपने बदल के आ

छुप-छुप के ऐसे ख़्वाब में कब तक मिलेगा तू
मिलने कभी तो ख़्वाब से बाहर निकल के आ

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जुदा किसी से किसी का ग़रज़ हबीब न हो
ये दाग़ वो है कि दुश्मन को भी नसीब न हो

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अपने मूल अर्थ में, 'हबीब' गहरी स्नेह और निकटता को दर्शाता है, जो अक्सर किसी प्रिय के लिए आरक्षित होता है। कविता ने इस शब्द को प्रेमियों, मित्रों, या यहाँ तक कि दिव्यता के बीच गहरे संबंध को व्यक्त करने के लिए अपनाया है, इसे भावनात्मक गहराई से भर दिया है।

'हबीब' का उपयोग कवि अक्सर प्रेम की कोमलता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह दूरस्थ प्रिय के लिए लालसा, पुनर्मिलन की खुशी, या दिव्यता के प्रति आध्यात्मिक प्रेम को दर्शा सकता है।

'हबीब' प्रेम की कोमल गले लगाने का भार वहन करता है, एक शब्द जो दिल की गहरी इच्छाओं को फुसफुसाता है।