Meaning of

हयात-ए-जाविदाँ

hayaat-e-jaavidaan • حیات جاوداں

अनंत जीवन; अमरता

eternal life; immortality

ابدی زندگی; لافانیت

Persian

'हसरत' की भी क़ुबूल हो मथुरा में हाज़िरी सुनते हैं आशिक़ों पे तुम्हारा करम है आज — Hasrat Mohani
एक दिवाने की यादों में एक दिवानी रक़्स करेगी सन्नाटे की तिर-किट-धिन पर रोज़ उदासी रक़्स करेगी यार कहानी लिखने वाले, जल्दी मिलवा हम दोनों को हम दोनों के मिलने पर ही तेरी कहानी रक़्स करेगी मेरी ग़ज़लें तुम गाओ तो ख़ुशबू ख़ुशबू हो जाएगी जैसे चम्पा के फूलों पर नन्ही तितली रक़्स करेगी तानाशाह ने क्या सोचा था, शहज़ादी को बाँध सकेगा प्यादे की धुन पर गाएगी, इश्क़ करेगी, रक़्स करेगी इक मुद्दत से गुम सुम थी जो, पिया मिलन पर चहक उठी है ढ़ोल नगाड़े बजवाओ अब, पागल लड़की रक़्स करेगी हम दोनों के मिल जाने से झूम उठेगा सारा मथुरा मोहन के काँधे पर सर रख राधा रानी रक़्स करेगी — RAVI GOSWAMI

यह वाक्यांश समय के परे जीवन की अवधारणा को प्रस्तुत करता है, एक ऐसी स्थिति जो समय के क्षय को चुनौती देती है। कविता में, यह अक्सर आत्मा की अमरता या प्रेम और विरासत की स्थायी प्रकृति का प्रतीक होता है।

कवि इसका उपयोग कालातीतता और भौतिक क्षेत्र से परे अर्थ की खोज के विषयों का अन्वेषण करने के लिए करते हैं। यह शांति या लालसा की भावना को जागृत कर सकता है।

यह पारगमन की अनंत खोज और स्थायी प्रभाव की आशा की बात करता है।