Meaning of

हयात-ए-जावेदाँ

hayaat-e-jawedaan • حیات جاوداں

अनंत जीवन; अमरता

eternal life; immortality

ابدی زندگی; لافانیت

Persian

पैग़ाम-ए-हयात-ए-जावेदाँ था हर नग़्मा-ए-कृष्ण बाँसुरी का — Hasrat Mohani
एक दिवाने की यादों में एक दिवानी रक़्स करेगी सन्नाटे की तिर-किट-धिन पर रोज़ उदासी रक़्स करेगी यार कहानी लिखने वाले, जल्दी मिलवा हम दोनों को हम दोनों के मिलने पर ही तेरी कहानी रक़्स करेगी मेरी ग़ज़लें तुम गाओ तो ख़ुशबू ख़ुशबू हो जाएगी जैसे चम्पा के फूलों पर नन्ही तितली रक़्स करेगी तानाशाह ने क्या सोचा था, शहज़ादी को बाँध सकेगा प्यादे की धुन पर गाएगी, इश्क़ करेगी, रक़्स करेगी इक मुद्दत से गुम सुम थी जो, पिया मिलन पर चहक उठी है ढ़ोल नगाड़े बजवाओ अब, पागल लड़की रक़्स करेगी हम दोनों के मिल जाने से झूम उठेगा सारा मथुरा मोहन के काँधे पर सर रख राधा रानी रक़्स करेगी — RAVI GOSWAMI

यह वाक्यांश अस्तित्व की अनंतता और अनवरत प्रकृति को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर आत्मा की भौतिक क्षेत्र से परे यात्रा का प्रतीक होता है, जो अनंतता और दिव्यता के विषयों को छूता है।

कवि इस वाक्यांश का उपयोग मृत्यु के परे जीवन, आत्मा की अमरता, और शाश्वत सत्य की खोज के विषयों को अन्वेषित करने के लिए करते हैं। यह सांसारिक जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति के विपरीत है।

कविता में 'हयात-ए-जावेदाँ' अनंत की ओर एक पुल बन जाता है, आत्मा की अनंत यात्रा पर चिंतन का आमंत्रण देता है।