Meaning of

हिज्राँ

hijraan • ہجراں

वियोग; लालसा

separation; longing

جدائی; آرزو

Arabic

सब्र था एक मूनिस-ए-हिज्राँ सो वो मुद्दत से अब नहीं आता — Meer Taqi Meer
इस महीने में ग़म-ए-हिज्राँ मिला है इस लिए नफ़रत है माह-ए-फ़रवरी से — Shajar Abbas
ये शब-ए-हिज्राँ है तो आप पे वाजिब है शजर हिज्र-ए-महबूब में गिर्या करो सीना पीटो — Shajar Abbas
शब-ए-हिज्राँ में सुनता था, सलीब-ए-वक़्त की सिसकी ये कुछ पागल समझते हैं घड़ी आवाज़ करती है — "Nadeem khan' Kaavish"
मेरे हम उम्र साथी इश्क़ में गर टूट जाए दिल ग़म-ए-हिज्राँ में इक महफ़िल सजाना, शा'इरी करना — AYUSH SONI
शब-ए-हिज्रां बुझा बैठी हूँ मैं सारे सितारे पर कोई फ़ानूस रौशन है ख़मोशी से मेरे अंदर — Kiran K
आख़िर को मिरे हाल पे वो शख़्स भी रोया कहता था जो कुछ भी नहीं दर्द-ए-ग़म-ए-हिज्राँ — Salman ashhadi sahil
देख लो आ के शजर हम ने ग़म-ए-हिज्राँ में अश्क दहलीज़ पे आँखों की सजा रक्खे हैं — Shajar Abbas

हिज्राँ दिल के वियोग की पीड़ा को व्यक्त करता है। यह दूरी से उत्पन्न होने वाले दर्द और लालसा को समेटे हुए है, अक्सर कविता में एक प्रिय के लिए गहरी तड़प को व्यक्त करने के लिए उपयोग किया जाता है।

कवि अक्सर 'हिज्राँ' का उपयोग प्रिय से दूर होने की भावनात्मक उथल-पुथल को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह दिल की मौन पुकार और पुनर्मिलन की अनंत प्रतीक्षा का प्रतीक हो सकता है।

अनुपस्थिति की गूंज में, 'हिज्राँ' अपनी आवाज़ पाता है, आत्मा की गहरी इच्छाओं के साथ गूंजता है।