Meaning of

हुबाब

hubaab • حباب

बुलबुला; क्षणिक; अस्थायी

bubble; ephemeral; transient

حباب; عارضی; فانی

Arabic

है फ़र्ज़ रिश्तेदारों और अहबाब पर शजर
मर जाऊँ मैं तो सोग में गिर्या-कुनाँ रहें

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जैसे पतवार सफ़ीने के लिए होते हैं
दोस्त अहबाब तो जीने के लिए होते हैं
इश्क़ में कोई तमाशा नहीं करना होता
अश्क जैसे भी हों पीने के लिए होते हैं

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ज़ब्त से चूर हो गया होगा
ग़म से मामूर हो गया होगा

बज़्म-ए-अहबाब छोड़ने वाला
कितना मजबूर हो गया होगा

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झुक के मिलना मेरी आदत नहीं मजबूरी है
मैं ने अहबाब के एहसान उठाए हुए हैं

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अहबाब मेरा कितना ज़ियादा बदल गया
तू पूछता है मुझ से भला क्या बदल गया

अब तू तड़ाक करता है वो बात बात पर
अब उस के बात चीत का लहजा बदल गया

क़ुर्बत में उस के अच्छे से अच्छे बदल गए
जो मैं भी उस के पास जा बैठा बदल गया

पहले तो साथ रहने की हामी बहुत भरी
फिर एक रोज़ उस का इरादा बदल गया

लैला बदल गई तो गई साथ साथ ही
मजनूँ बदल गया ये ज़माना बदल गया

तस्वीर अर्से बा'द बदलती है सब्र रख
ऐसा नहीं न होता कि सोचा बदल गया

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अदू के हाथ में तो फूल देखे हैं मगर ये क्या
मेरे अहबाब के है हाथ में हथियार जाने क्यूँँ

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क्या हुईं वो क़ुर्बतें अहबाब को क्या हो गया
आते-जाते मिल गईं आँखें तो मिलना हो गया

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वो जो थी हक़ीक़त थी या फिर ख़्वाब था क्या था
जिस के लिए मैं रोया वो अहबाब था क्या था

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यहाँ इंसान को इंसान बनने की ज़रूरत है
तो फिर क्यूँ लोग करते हैं हमेशा ख़ून की बातें

ज़मीं दो गज़ ज़फ़र क्यूँ माँगता अहबाब से अपने
उसे अच्छी लगी होतीं अगर रंगून की बातें

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मिरे अहबाब तो दो सौ हैं लेकिन
बहुत जो ख़ास हैं वो एक-दो हैं

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है फ़र्ज़ रिश्तेदारों और अहबाब पर शजर
मर जाऊँ मैं तो सोग में गिर्या-कुनाँ रहें

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जैसे पतवार सफ़ीने के लिए होते हैं
दोस्त अहबाब तो जीने के लिए होते हैं
इश्क़ में कोई तमाशा नहीं करना होता
अश्क जैसे भी हों पीने के लिए होते हैं

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हुबाब अपने सार में अस्तित्व की क्षणभंगुरता को पकड़ता है। यह सुंदरता और नाजुकता की एक नाजुक छवि है, एक क्षणिक चमक जो जीवन की अस्थायी प्रकृति को दर्शाती है। कविता में, यह अक्सर उन क्षणिक खुशियों और दुखों का प्रतीक होता है जो हमारी चेतना की सतह पर नृत्य करते हैं।

कवि अक्सर 'हुबाब' का उपयोग जीवन की क्षणभंगुर सुंदरता, खुशी की क्षणिकता, और समय के अपरिहार्य प्रवाह को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अस्तित्व और विस्मृति के बीच नाजुक संतुलन के लिए एक रूपक के रूप में कार्य करता है।

हुबाब हमें हमारे अनुभवों की नाजुक और क्षणभंगुर प्रकृति की याद दिलाता है। यह हमें प्रत्येक क्षण को संजोने के लिए आमंत्रित करता है, यह जानते हुए कि यह एक बुलबुले की तरह क्षणिक है।