Meaning of

आह-ओ-फ़ुग़ाँ

aah-o-fugan • آہ و فغاں

आहें और विलाप; दुःख के क्रंदन

sighs and lamentations; cries of sorrow

آہیں اور فغاں; غم کے نالے

Persian

चार सू आह-ओ-फ़ुग़ाँ है दर्द है
मुश्किलों में मुब्तिला हर फ़र्द है

वक़्त के हाकिम की नज़रों में शजर
जो भी हक़ माँगे वो दहशत-गर्द है

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कहाँ जा के ये अश्क अपने बहाऊँ
मक़ामात-ए-आह-ओ-फ़ुग़ाँ ही नहीं है

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आशिक़ों का यही अफ़साना है और कुछ भी नहीं
कुछ न कर पाएँ तो वो आह-ओ-फ़ुग़ाँ तक पहुँचे

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एक दिन आह-ओ-फ़ुगाँ से ऊब कर
चल पड़े हम दास्ताँ से ऊब कर

आख़िरश मेरा भी मक़सद बन गया
धूल बनना कहकशाँ से ऊब कर

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मुफ़लिस से पूछ लेना सूद-ओ-ज़ियाँ का मतलब
बे-घर ही जानता है अपने मकाँ का मतलब

ये लोग चल पड़े हैं बस तालियों की जानिब
अहल-ए-सुख़न से पूछो आह-ओ-फ़ुग़ाँ का मतलब

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हाल-ए-दिल दीवार-ओ-दर से यूँँ बयाँ करते रहे
रात भर रह रह के हम आह-ओ-फ़ुग़ाँ करते रहे

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चार सू आह-ओ-फ़ुग़ाँ है दर्द है
मुश्किलों में मुब्तिला हर फ़र्द है

वक़्त के हाकिम की नज़रों में शजर
जो भी हक़ माँगे वो दहशत-गर्द है

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कहाँ जा के ये अश्क अपने बहाऊँ
मक़ामात-ए-आह-ओ-फ़ुग़ाँ ही नहीं है

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'आह-ओ-फ़ुग़ाँ' एक पीड़ित हृदय की गहरी, गूंजती हुई पुकार को व्यक्त करता है। कविता में, यह हानि और लालसा की कच्ची भावना को पकड़ता है, आत्मा की सबसे कमजोर क्षणों में बाहर निकलने की आवाज़।

कवि 'आह-ओ-फ़ुग़ाँ' का उपयोग गहरे दुःख और लालसा को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर अप्राप्त प्रेम या अस्तित्वगत निराशा की पृष्ठभूमि में सेट होता है, मानवीय स्थिति की एक जीवंत तस्वीर बनाता है।

'आह-ओ-फ़ुग़ाँ' हृदय के सबसे गहरे दुःखों की गूंज है, भावना की स्थायी शक्ति का प्रमाण है।