Meaning of

आही

aahi • آہی

आह; विलाप

sigh; lamentation

آہ; فریاد

Persian

अदाकार के कुछ भी बस का नहीं है
मोहब्बत है ये कोई ड्रामा नहीं है

जिसे तेरी आँखें बताती हैं रस्ता
वो राही कहीं भी पहुँचता नहीं है

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बात ही कब किसी की मानी है
अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी

ये कलाई ये जिस्म और ये कमर
तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी

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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने
तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने

मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ
लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने

107

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अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपाएँ कैसे
तेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ नज़र आएँ कैसे

97

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मेरा अरमान मेरी ख़्वाहिश नहीं है
ये दुनिया मेरी फ़रमाइश नहीं है

मैं तेरे ख़्वाब वापस कर रहा हूँ
मेरी आँखों में गुंजाइश नहीं है

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लोग सुन कर वाह-वाही करते हैं हर बार ही
रोज़ ही रोता हूँ अब तो मैं किसी सुर-ताल में

88

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मैं ने जैसी चाही थी ना वैसी इन
में खनखन नइँ
जितने प्यारे हाथ हैं तेरे उतने प्यारे कंगन नइँ

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जान-लेवा थीं ख़्वाहिशें वर्ना
वस्ल से इंतिज़ार अच्छा था

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मेरे होंटों पे किसी लम्स की ख़्वाहिश है शदीद
ऐसा कुछ कर मुझे सिगरेट को जलाना न पड़े

69

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दबी कुचली हुई सब ख़्वाहिशों के सर निकल आए
ज़रा पैसा हुआ तो च्यूँँटियों के पर निकल आए

अभी उड़ते नहीं तो फ़ाख़्ता के साथ हैं बच्चे
अकेला छोड़ देंगे माँ को जिस दिन पर निकल आए

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अदाकार के कुछ भी बस का नहीं है
मोहब्बत है ये कोई ड्रामा नहीं है

जिसे तेरी आँखें बताती हैं रस्ता
वो राही कहीं भी पहुँचता नहीं है

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बात ही कब किसी की मानी है
अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी

ये कलाई ये जिस्म और ये कमर
तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी

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आही शब्द एक गहरी उदासी और तड़प का भाव जगाता है। मूल रूप में यह एक साधारण आह है, एक सांस का छोड़ना जो अनकहे दुःख का भार लिए होता है। कविता ने इस शब्द को अपनाया है, इसके अर्थ को हृदय की मौन पुकारों और आत्मा में गूंजती अनकही विलापों तक विस्तारित किया है।

कवि अक्सर 'आही' का उपयोग अधूरी इच्छाओं की गहराई और जुदाई के दर्द को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो मौन पीड़ा और हृदय के बोझों की शांत सहनशीलता का सार पकड़ता है।

'आही' की शांत फुसफुसाहट में, हृदय के गहरे दुःखों की गूंज मिलती है।