Meaning of

अफ़्कार

afkar • افکار

विचार; ख्याल; चिंतन

thoughts; ideas; reflections

خیالات; تصورات; غور و فکر

Arabic

अज़ राहे सुख़न जब भी क़लम मेरा उठा है
अफ़्कार की दुनिया का नया बाब खुला है

सच्चाई तो ये है कि अभी मुझ सेा क़लमकार
लफ़्ज़ों को बरतने का हुनर सीख रहा है

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अपने भी तुझ को अपनों में अब गिन नहीं रहे
'अफ़कार' मान जा कि तेरे दिन नहीं रहे

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बद-दुआ है के वहाँ आए जहाँ बैठते थे
और ‘अफ़्कार’ वहाँ आप को बैठा न मिले

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नाला हूँ मैं बेदारी-ए-एहसास के हाथों
दुनिया मिरे अफ़्कार की दुनिया नहीं होती

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लुभाते थे उसे बस आज के शाइ'र सो मैं ने भी
पढ़ीं तहजीब की ग़ज़लें करीं अफ़्कार की बातें

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अज़ राहे सुख़न जब भी क़लम मेरा उठा है
अफ़्कार की दुनिया का नया बाब खुला है

सच्चाई तो ये है कि अभी मुझ सेा क़लमकार
लफ़्ज़ों को बरतने का हुनर सीख रहा है

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अपने भी तुझ को अपनों में अब गिन नहीं रहे
'अफ़कार' मान जा कि तेरे दिन नहीं रहे

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'अफ़्कार' मूल रूप से उन विचारों और ख्यालों को दर्शाता है जो मन में आते हैं। कविता में, यह आत्मा को झकझोरने वाले गहरे चिंतन और मनन का माध्यम बन जाता है, जो अक्सर अस्तित्ववादी विचारों का भार उठाता है।

'अफ़्कार' का उपयोग कवि मन के भूलभुलैया में उतरने के लिए करते हैं। यह उन मौन संवादों को उभारता है जो हम स्वयं से करते हैं। अक्सर भावनाओं के विपरीत, यह बौद्धिकता को भावुकता पर प्रमुखता देता है।

'अफ़्कार' हमें अपने विचारों के गलियारों में भटकने के लिए आमंत्रित करता है, एक यात्रा जो अकेली और गहन होती है।