Meaning of

अफ़्सोस

afsos • افسوس

पछतावा; दुःख

regret; sorrow

افسوس; غم

Persian

किसी की चंद रातों का सुधाकर हो नहीं पाया
तुम्हारी उर्मियों का मैं, उर-अंतर हो नहीं पाया

सरल थीं मन की प्रतिमाएं, मगर अफ़सोस है इतना
मैं सब कुछ था तेरा, मेहंदी महावर हो नहीं पाया

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मुझे बातें नहीं तेरी मोहब्बत चाहिए थी
मुझे अफ़सोस है ये मुझ को कहना पड़ रहा है

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इंसान अपने आप में मजबूर है बहुत
कोई नहीं है बे-वफ़ा अफ़्सोस मत करो

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वो सर भी काट देता तो होता न कुछ मलाल
अफ़्सोस ये है उस ने मेरी बात काट दी

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अफ़सोस हो रहा है तेरी शक्ल देख कर
क्या कोई तेरा चाहने वाला नहीं रहा

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फ़ातिहा पढ़ कि फूल रख मुझ पर
आ गया है तो कुछ जता अफ़सोस

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हम चाहते थे मौत ही हम को जुदा करे
अफ़्सोस अपना साथ वहाँ तक नहीं हुआ

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बोसाँ लबाँ सीं देने कहा कह के फिर गया
प्याला भरा शराब का अफ़्सोस गिर गया

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उस को चाहा और चाहत पर क़ायम हैं
पर अफ़सोस के हम इज़हार नहीं कर सकते

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ये मयख़ाने में बैठ अफ़सोस अब क्यूँ
तेरे हिस्से भी तो जवानी लिखी थी

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किसी की चंद रातों का सुधाकर हो नहीं पाया
तुम्हारी उर्मियों का मैं, उर-अंतर हो नहीं पाया

सरल थीं मन की प्रतिमाएं, मगर अफ़सोस है इतना
मैं सब कुछ था तेरा, मेहंदी महावर हो नहीं पाया

8

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मुझे बातें नहीं तेरी मोहब्बत चाहिए थी
मुझे अफ़सोस है ये मुझ को कहना पड़ रहा है

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'अफ़्सोस' गहरे पछतावे या दुःख की भावना को व्यक्त करता है। कविता में, यह छूटे हुए अवसरों और अधूरी इच्छाओं के उदासीन सार को पकड़ता है, जो मानव स्थिति के साथ गूंजता है।

कवि अक्सर 'अफ़्सोस' का उपयोग अनकहे शब्दों के बोझ और खोए हुए क्षणों के दर्द को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह जीवन की क्षणभंगुर प्रकृति की याद दिलाता है।

अफ़्सोस एक छाया की तरह बना रहता है, जीवन की यात्रा में एक स्थायी साथी।