Meaning of

अफ़ज़ा

afzaa • افزا

वृद्धि; बढ़ोतरी; फलना-फूलना

enhancing; increasing; flourishing

اضافہ; بڑھوتری; پھلنا پھولنا

Persian

दिल-ए-ना-सब्र पे ये रात सितम-अफ़्ज़ा थी
याद आई तेरी आँखों में सितारे चमके

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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में

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ख़ुद ही अपनी हौसला-अफ़ज़ाई की
इतनी आदत पड़ गई तन्हाई की

शाने पे सर रख के रोई किस के तुम
कौन था जिस ने मिरी भरपाई की

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दिल-ए-ना-सब्र पे ये रात सितम-अफ़्ज़ा थी
याद आई तेरी आँखों में सितारे चमके

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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में

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अफ़ज़ा वृद्धि और संवर्धन की भावना का सुझाव देता है, अक्सर कविता में भावनाओं की वृद्धि या प्रेम और करुणा के लिए हृदय की क्षमता के विस्तार को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है।

कवि इसका उपयोग प्रेम या ज्ञान में वृद्धि के विचार को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह ठहराव के विपरीत होता है, जीवन्तता और जीवन का प्रतीक होता है।

अफ़ज़ा वृद्धि की भावना को समेटे हुए है, जीवन की निरंतर विस्तारशील क्षमता की काव्यात्मक याद दिलाता है।