Meaning of

अग्नी

agni • اگنی

आग; ज्वाला; जुनून

fire; flame; passion

آگ; شعلہ; جذبہ

Sanskrit

किसी भी वक़्त अब तो टूट सकती है
तुम्हारी याद की ये अलगनी जानाँ

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अभी से चल दिए उठ के, ज़रा सी बात क्या निकली
अभी तो आग लगनी है, तमाशा और भी होगा

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"वो अकेला है"
वो अकेला है

न जाने कितनी तन्हाइयो को उस ने झेला है
ग़मों से उस ने बे झिझक बोला है

वो अकेला है
मिलती नहीं उसे कोई तान

जब ढलती है शाम
कहता नहीं कोई बात

फिर भी नहीं रहता शांत
वो अकेला है

उस ने तपती अग्नि में खेला है
उस के जीवन की अजीब लीला है

न जाने कैसा अलबेला है
उस का राज़ चुप्पियों ने ही खोला है

वो अकेला है
कहता है कि चाह नहीं है

फिर भी आह भरता है
जताता है कि कोई राह नहीं है

फिर भी चलता रहता है
वो अकेला है

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आहें यक़ीनन तुम को है लगनी चमन की, याद रख
तोड़ा है तुम ने गुल जो उस का, कोई दिल के वास्ते

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कभी कपड़े सुखाने छत पे आओ
मैं कब से अलगनी बनकर खड़ा हूँ

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ओ मेघ घनेरे प्रियतम मेरे अब तो आ जाओ
बेला मदमाती अग्नि जगाती प्यास बुझा जाओ

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उजलत में राह भूल भी जाता है राहगीर
दो चार ठोकरें मुझे लगनी ही चाहिए

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तमाशा होने वाला है रुको कुछ पल
किसी के चोट लगनी है अचानक से

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किसी भी वक़्त अब तो टूट सकती है
तुम्हारी याद की ये अलगनी जानाँ

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अभी से चल दिए उठ के, ज़रा सी बात क्या निकली
अभी तो आग लगनी है, तमाशा और भी होगा

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अग्नि, अग्नि की मूल शक्ति, विनाश और सृजन दोनों को दर्शाती है। कविता में, यह भावनाओं की जलती हुई तीव्रता और जुनून की परिवर्तनकारी शक्ति का प्रतीक है।

कवि अक्सर 'अग्नि' का उपयोग प्रेम की तीव्रता या इच्छा की भस्म करने वाली प्रकृति को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह जीवन की शुद्धिकरण परीक्षाओं या सत्य की निरंतर खोज का भी प्रतिनिधित्व कर सकता है।

अग्नि कविता के हृदय में उज्ज्वल रूप से जलती है, सृजन और विनाश दोनों का प्रतीक। यह हमें जुनून की द्वैत प्रकृति की याद दिलाती है।