"वो अकेला है"

वो अकेला है

न जाने कितनी तन्हाइयो को उस ने झेला है
ग़मों से उस ने बे झिझक बोला है

वो अकेला है
मिलती नहीं उसे कोई तान

जब ढलती है शाम
कहता नहीं कोई बात

फिर भी नहीं रहता शांत
वो अकेला है

उस ने तपती अग्नि में खेला है
उस के जीवन की अजीब लीला है

न जाने कैसा अलबेला है
उस का राज़ चुप्पियों ने ही खोला है

वो अकेला है
कहता है कि चाह नहीं है

फिर भी आह भरता है
जताता है कि कोई राह नहीं है

फिर भी चलता रहता है
वो अकेला है

— Swapna Yadav

Naqab Shayari

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