Meaning of

अहबाब

ahbaab • احباب

मित्र; साथी; प्रियजन

friends; companions; beloved ones

دوست; ساتھی; محبوب

Arabic

है फ़र्ज़ रिश्तेदारों और अहबाब पर शजर
मर जाऊँ मैं तो सोग में गिर्या-कुनाँ रहें

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जैसे पतवार सफ़ीने के लिए होते हैं
दोस्त अहबाब तो जीने के लिए होते हैं
इश्क़ में कोई तमाशा नहीं करना होता
अश्क जैसे भी हों पीने के लिए होते हैं

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ज़ब्त से चूर हो गया होगा
ग़म से मामूर हो गया होगा

बज़्म-ए-अहबाब छोड़ने वाला
कितना मजबूर हो गया होगा

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झुक के मिलना मेरी आदत नहीं मजबूरी है
मैं ने अहबाब के एहसान उठाए हुए हैं

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अहबाब मेरा कितना ज़ियादा बदल गया
तू पूछता है मुझ से भला क्या बदल गया

अब तू तड़ाक करता है वो बात बात पर
अब उस के बात चीत का लहजा बदल गया

क़ुर्बत में उस के अच्छे से अच्छे बदल गए
जो मैं भी उस के पास जा बैठा बदल गया

पहले तो साथ रहने की हामी बहुत भरी
फिर एक रोज़ उस का इरादा बदल गया

लैला बदल गई तो गई साथ साथ ही
मजनूँ बदल गया ये ज़माना बदल गया

तस्वीर अर्से बा'द बदलती है सब्र रख
ऐसा नहीं न होता कि सोचा बदल गया

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अदू के हाथ में तो फूल देखे हैं मगर ये क्या
मेरे अहबाब के है हाथ में हथियार जाने क्यूँँ

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क्या हुईं वो क़ुर्बतें अहबाब को क्या हो गया
आते-जाते मिल गईं आँखें तो मिलना हो गया

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वो जो थी हक़ीक़त थी या फिर ख़्वाब था क्या था
जिस के लिए मैं रोया वो अहबाब था क्या था

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यहाँ इंसान को इंसान बनने की ज़रूरत है
तो फिर क्यूँ लोग करते हैं हमेशा ख़ून की बातें

ज़मीं दो गज़ ज़फ़र क्यूँ माँगता अहबाब से अपने
उसे अच्छी लगी होतीं अगर रंगून की बातें

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मिरे अहबाब तो दो सौ हैं लेकिन
बहुत जो ख़ास हैं वो एक-दो हैं

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है फ़र्ज़ रिश्तेदारों और अहबाब पर शजर
मर जाऊँ मैं तो सोग में गिर्या-कुनाँ रहें

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जैसे पतवार सफ़ीने के लिए होते हैं
दोस्त अहबाब तो जीने के लिए होते हैं
इश्क़ में कोई तमाशा नहीं करना होता
अश्क जैसे भी हों पीने के लिए होते हैं

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'अहबाब' में संगति की गर्माहट और प्रिय मित्रों का आराम होता है। कविता में, यह अक्सर साझा क्षणों की याद और विदाई की मधुर-कड़वी भावना को जगाता है।

कवि 'अहबाब' का उपयोग प्रिय मित्रताओं और समय को पार करने वाले बंधनों की याद दिलाने के लिए करते हैं। यह अलगाव के दर्द और पुनर्मिलन की लालसा को भी दर्शा सकता है।

कविता में, 'अहबाब' दिलों को दूरियों के पार बांधने वाले बंधनों की कोमल याद दिलाता है।