Meaning of

अहल-ए-करम

ahl-e-karam • اہل کرم

उदारता के लोग; परोपकारी

people of generosity; benevolent ones

اہل کرم; خیر خواہ

Arabic

नहीं हूँ किसी भी हरम में नहीं हूँ
किसी आस्था के भरम में नहीं हूँ

मुझे तेरे जाने का ग़म भी नहीं है
किसी का भी अहल-ए-करम मैं नहीं हूँ

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बना कर फ़क़ीरों का हम भेस 'ग़ालिब'
तमाशा-ए-अहल-ए-करम देखते हैं

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कसरत से नोश कर के शजर जाम-ए-इश्क़ को
हर रोज़ रक़्स करते हैं कू-ए-सनम में हम

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एक दिन अहल-ए-करम सारे हसीं ख़्वाबों ने
रख के सर आँखों की आग़ोश में दम तोड़ा था

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क़ैस पागल था मरा बर सर-ए-सहरा जा कर
हम अगर होते शजर कू-ए-सनम में मरते

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नहीं हूँ किसी भी हरम में नहीं हूँ
किसी आस्था के भरम में नहीं हूँ

मुझे तेरे जाने का ग़म भी नहीं है
किसी का भी अहल-ए-करम मैं नहीं हूँ

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बना कर फ़क़ीरों का हम भेस 'ग़ालिब'
तमाशा-ए-अहल-ए-करम देखते हैं

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यह वाक्यांश दया और निःस्वार्थता की भावना को समाहित करता है। कविता में, यह अक्सर मानव करुणा के आदर्श और समाज को ऊँचा उठाने वाले महान गुणों का प्रतीक होता है।

कवि इसका उपयोग परोपकार और नैतिक अखंडता के विषयों को उजागर करने के लिए करते हैं। यह स्वार्थ और लालच की आलोचना के रूप में भी काम कर सकता है।

हमें साझा मानवता में बाँधने वाले गुणों को अपनाने का आह्वान।