Meaning of

ऐब

aib • عیب

दोष; खामी; कमी

flaw; defect; imperfection

نقص; خامی; کمی

Arabic

हुनर समझो या कोई ऐब समझो इस को के जाँ हम
हो चाहें ख़ाक हासिल फिर भी पुर-उम्मीद रहते हैं

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केवल उस का हाथ मेरी बर्बादी में
और तो कोई ऐब नहीं शहज़ादी में

प्यार बहुत करता था उस सेे मैं लेकिन
प्यार नहीं देखा जाता है शादी में

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पा ए उम्मीद प रक्खे हुए सर हैं हम लोग
हैं न होने के बराबर ही मगर हैं हम लोग

तू ने बरता ही नहीं ठीक से हम को ऐ दोस्त
ऐब लगते हैं ब-ज़ाहिर प हुनर हैं हम लोग

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आते हैं ग़ैब से ये मज़ामीं ख़याल में
'ग़ालिब' सरीर-ए-ख़ामा नवा-ए-सरोश है

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न थी हाल की जब हमें अपने ख़बर रहे देखते औरों के ऐब-ओ-हुनर
पड़ी अपनी बुराइयों पर जो नज़र तो निगाह में कोई बुरा न रहा

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मुझे पता है मुहब्बत में क्या से क्या होगा
जिसे तुम अपना समझते हो बे-वफ़ा होगा

जो तेरे इश्क़ में बस ऐब ही तलाश करे
वो शख़्स यार भला ख़ाक हमनवा होगा

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अपने दौर की सब सेे टेढ़ी लड़की मैं
वो इस दौर का सब सेे सीधा लड़का है

एक ही ऐब है उस
में सिगरेट पीता है
बाक़ी सरापा इकदम आला लड़का है

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फ़ुर्सत नहीं मुझे कि करूँँ इश्क़ फिर से अब
माज़ी की चोटों से अभी उभरा नहीं हूँ मैं

डर है कहीं ये ऐब उसे रुस्वा कर न दे
सो ग़म में भी शराब को छूता नहीं हूँ मैं

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मुस्कुराने लगा हूँ तुम्हारे लिए
घर सजाने लगा हूँ तुम्हारे लिए

ऐब अपने तो सारे मिटा कर के मैं
गीत गाने लगा हूँ तुम्हारे लिए

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किसी का 'ऐब मत खोलो तुम अपने आप को देखो
बुरा पापी नहीं होता तुम उस के पाप को देखो

अगर बनना है तुम को एक बेहतर आदमी तो फिर
कलाकारों को मत देखो तुम अपने बाप को देखो

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हुनर समझो या कोई ऐब समझो इस को के जाँ हम
हो चाहें ख़ाक हासिल फिर भी पुर-उम्मीद रहते हैं

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केवल उस का हाथ मेरी बर्बादी में
और तो कोई ऐब नहीं शहज़ादी में

प्यार बहुत करता था उस सेे मैं लेकिन
प्यार नहीं देखा जाता है शादी में

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'ऐब' शब्द में अपूर्णता का भाव है, एक ऐसा दाग जो किसी पूर्ण वस्तु की सतह को बिगाड़ देता है। कविता में, यह अक्सर मानवीय स्थिति को दर्शाता है, जहाँ दोष केवल शारीरिक नहीं होते, बल्कि गहरे भावनात्मक होते हैं, जो अस्तित्व की नाजुकता और अस्थिरता को प्रकट करते हैं।

'ऐब' का उपयोग कवि अक्सर आंतरिक संघर्ष और आत्म-जागरूकता के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह आत्मा के छिपे हुए घावों का प्रतीक हो सकता है, वे अदृश्य संघर्ष जो मानव अनुभव को परिभाषित करते हैं। यह शब्द पूर्णता के आदर्शों के विपरीत है, अपूर्णता में पाई जाने वाली सुंदरता को उजागर करता है।

कविता में, 'ऐब' आत्मा की छिपी गहराइयों को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण बन जाता है। यह हमें याद दिलाता है कि अपूर्णता कोई दोष नहीं, बल्कि हमारी साझा मानवता का एक पहलू है।