Meaning of

अलाहिदा

alahida • الگ

अलग; विशेष

separate; distinct

الگ; خاص

Arabic

किसी भी वक़्त अब तो टूट सकती है
तुम्हारी याद की ये अलगनी जानाँ

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टैडी बियर, बिंदिया, पायल, झूमके, कंगन और गुलाब
उस लड़की को सालगिरह पर ये सब तोहफ़े देने हैं

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सत्य कहता हूँ जल्प है ही नहीं
मेरा जीवन तो अल्प है ही नहीं

प्रेम, अलगाव मात्र अंतिम पथ
और कोई विकल्प है ही नहीं

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वो मेरी फाल्गुनी, मैं उस का माँझी हूँ
मैं शब्दों से ग़ज़लों के पर्वत खोदूँगा

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सालगिरह पर उस ने पहली बार मुझे
अपना नंबर लिख के दिया था तोहफ़े में

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कभी कपड़े सुखाने छत पे आओ
मैं कब से अलगनी बनकर खड़ा हूँ

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कैसी अब सालगिरह कैसी बधाई लोगों
वो जो बिछड़ा तो मेरी उम्र घटा दी उस ने

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दुआ में तुम जिसे माँगो वही फ़रहाद होना था
सनम को रब समझकर इश्क़ में प्रहलाद होना था

सरल शब्दों में बोलूँ तो अलग दोनों में था बस ये
तुम्हें आबाद दिखना था मुझे बर्बाद होना था

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अर्जी है तेरे पूरे हों नेक इरादे सब
मेरी जाँ मुबारक हो ये साल-गिरह तुम को

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हमारी सालगिरह पर उन्होंने तोहफ़े में
सबा के हाथ उदासी मलाल भेजा है

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किसी भी वक़्त अब तो टूट सकती है
तुम्हारी याद की ये अलगनी जानाँ

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टैडी बियर, बिंदिया, पायल, झूमके, कंगन और गुलाब
उस लड़की को सालगिरह पर ये सब तोहफ़े देने हैं

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मूल रूप से 'अलाहिदा' अलगाव या विशेषता का भाव देता है, अक्सर किसी ऐसी चीज़ का वर्णन करता है जो अलग खड़ी होती है। कविता में, यह एक व्यक्ति की एकांतता या अनुभव की विशिष्टता को दर्शाता है, अलग खड़े होने की सुंदरता या उदासी को उजागर करता है।

'अलाहिदा' का उपयोग कवि अक्सर अलगाव या व्यक्तित्व के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह भीड़ में एक अकेले व्यक्ति, समय में एक अनोखे क्षण, या एक भावना की विशिष्टता का वर्णन कर सकता है।

अपने काव्यात्मक सार में, 'अलाहिदा' अलग खड़े होने की गहरी सुंदरता को पकड़ता है, एकांत की समृद्धि का प्रमाण।