Meaning of

अर्ज

arj • عرض

अनुरोध; प्रार्थना; निवेदन

request; plea; submission

درخواست; التجا; عرض

Arabic

चुप-चाप अपनी आग में जलते रहो 'फ़राज़'
दुनिया तो अर्ज़-ए-हाल से बे-आबरू करे

32

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इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है
नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है

75

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भूलभुलैया था उन ज़ुल्फ़ों में लेकिन
हम को उस
में अपनी राहें दिखती थीं

आप की आँखों को देखा तो इल्म हुआ
क्यूँँ अर्जुन को केवल आँखें दिखती थीं

63

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'ग़ालिब' न कर हुज़ूर में तू बार बार अर्ज़
ज़ाहिर है तेरा हाल सब उन पर कहे बग़ैर

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तेरी रंजिश खुली तर्ज-ए-बयाँ से
न थी दिल में तो क्यूँँ निकली ज़बाँ से

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हमारा इश्क़ इबादत का अगला दर्जा है
ख़ुदा ने छोड़ दिया तो तुम्हारा नाम लिया

ग़मों से बैर था सो हम ने ख़ुद-कुशी कर ली
शजर ने गिर के परिंदों से इन्तेक़ाम लिया

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इक तर्ज़-ए-तग़ाफ़ुल है सो वो उन को मुबारक
इक अर्ज़-ए-तमन्ना है सो हम करते रहेंगे

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मुझ को बस उस की ख़ुशियों से मतलब है
अर्जुन को बस आँख दिखाई देती है

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उठते नहीं हैं अब तो दुआ के लिए भी हाथ
किस दर्जा ना-उमीद हैं परवरदिगार से

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इक अव्वल दर्जे का पाक इक माहिर है
मन तो तुझ में रमता है दिल काफ़िर फिर है

अपनी सोचो क़त्ल तुम्हें करना भी है
बन्दे का तो क्या है बन्दा हाज़िर है

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चुप-चाप अपनी आग में जलते रहो 'फ़राज़'
दुनिया तो अर्ज़-ए-हाल से बे-आबरू करे

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इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है
नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है

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मूल रूप से, 'अर्ज' विनम्रता और ईमानदारी के साथ अनुरोध करने की भावना को व्यक्त करता है। कविता में, यह अक्सर वक्ता की संवेदनशीलता और ईमानदारी को दर्शाता है, जो समझ या करुणा की तलाश में होता है।

कवि 'अर्ज' का उपयोग दिल से की गई प्रार्थनाओं को व्यक्त करने के लिए करते हैं, अक्सर प्रेम या दिव्य प्रार्थना के संदर्भ में। यह लालसा और एक करुणामय प्रतिक्रिया की आशा के सार को पकड़ता है।

अपनी काव्यात्मक रूप में, 'अर्ज' हृदय की इच्छाओं और दुनिया की वास्तविकताओं के बीच एक पुल बन जाता है, जो आशा और विनम्रता के शाश्वत नृत्य को दर्शाता है।