Meaning of

अस्र

asar • عصر

युग; समय; काल

era; time; age

عصر; وقت; زمانہ

Arabic

तुम न आए तो क्या सहर न हुई
हाँ मगर चैन से बसर न हुई

मेरा नाला सुना ज़माने ने
एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई

50

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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था
एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था

223

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ज़िंदगी किस तरह बसर होगी
दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में

163

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मैं क़िस्सा मुख़्तसर कर के, ज़रा नीची नज़र कर के
ये कहता हूँ अभी तुम से, मोहब्बत हो गई तुम से

106

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तारीकियों को आग लगे और दिया जले
ये रात बैन करती रहे और दिया जले

उस की ज़बाँ में इतना असर है कि निस्फ़ शब
वो रौशनी की बात करे और दिया जले

103

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दास्ताँ हूँ मैं इक तवील मगर
तू जो सुन ले तो मुख़्तसर भी हूँ

96

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मैं जिस के साथ कई दिन गुज़ार आया हूँ
वो मेरे साथ बसर रात क्यूँँ नहीं करता

54

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मेरी हर बात बे-असर ही रही
नक़्स है कुछ मिरे बयान में क्या

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हम मिल के आ गए मगर अच्छा नहीं लगा
फिर यूँँ हुआ असर कि घर अच्छा नहीं लगा

इक बार दिल में तुझ सेे जुदाई का डर बना
फिर दूसरा कोई भी डर अच्छा नहीं लगा

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ज़िंदगी यूँँ हुई बसर तन्हा
क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा

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तुम न आए तो क्या सहर न हुई
हाँ मगर चैन से बसर न हुई

मेरा नाला सुना ज़माने ने
एक तुम हो जिसे ख़बर न हुई

50

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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था
एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था

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अस्र शब्द समय के प्रवाह को दर्शाता है, जो घटनाओं के विकास का मौन साक्षी होता है। कविता में, यह अक्सर पुरानी यादों और समय के अपरिहार्य परिवर्तन का भार लेकर आता है।

कवि 'अस्र' का उपयोग जीवन की क्षणभंगुरता पर विचार करने के लिए करते हैं। यह यादों के धीरे-धीरे मिटने या समय की निरंतर प्रगति का प्रतीक हो सकता है।

अस्र समय की मौन यात्रा का सार पकड़ता है, जीवन की क्षणिक सुंदरता की याद दिलाता है।