Meaning of

अश्क

ashk • اشک

आँसू; दुःख की बूँद

tear; drop of sorrow

اشک; غم کا قطرہ

Persian

भोले बन कर हाल न पूछ बहते हैं अश्क तो बहने दो
जिस से बढ़े बेचैनी दिल की ऐसी तसल्ली रहने दो

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ज़ेहन से यादों के लश्कर जा चुके
वो मेरी महफ़िल से उठ कर जा चुके

मेरा दिल भी जैसे पाकिस्तान है
सब हुकूमत कर के बाहर जा चुके

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अश्कों से बुझाकर आया हूँ
जो आग लगी है झरने में

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अश्कों को आरज़ू-ए-रिहाई है रोइए
आँखों की अब इसी में भलाई है रोइए

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धमका के बोसे लूँगा रुख़-ए-रश्क-ए-माह का
चंदा वसूल होता है साहब दबाव से

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मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया
बर्क़ सी गिर गई काम ही कर गई आग ऐसी लगाई मज़ा आ गया

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जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क
यूँँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े

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जैसे पतवार सफ़ीने के लिए होते हैं
दोस्त अहबाब तो जीने के लिए होते हैं
इश्क़ में कोई तमाशा नहीं करना होता
अश्क जैसे भी हों पीने के लिए होते हैं

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इतना तो ज़िन्दगी में किसी के ख़लल पड़े
हँसने से हो सुकून न रोने से कल पड़े

जिस तरह हँस रहा हूँ मैं पी पी के गर्म अश्क
यूँँ दूसरा हँसे तो कलेजा निकल पड़े

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अल्लाह बना दे मिरे अश्कों को कबूतर
सब पूछ रहे हैं तिरे रूमाल में क्या है

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भोले बन कर हाल न पूछ बहते हैं अश्क तो बहने दो
जिस से बढ़े बेचैनी दिल की ऐसी तसल्ली रहने दो

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ज़ेहन से यादों के लश्कर जा चुके
वो मेरी महफ़िल से उठ कर जा चुके

मेरा दिल भी जैसे पाकिस्तान है
सब हुकूमत कर के बाहर जा चुके

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'अश्क' शब्द आँसुओं की छवि में डूबा हुआ है। यह दुःख और लालसा की मौन भाषा को व्यक्त करता है। कविता में, यह अनकहे भावनाओं का प्रतीक बन जाता है, दिल की चुप्पी का विलाप।

कवि अक्सर 'अश्क' का उपयोग गहरे दुःख और लालसा को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह आत्मा की मौन चीखों का रूपक है, जिसे अक्सर खुशी के विपरीत रखा जाता है ताकि भावनाओं की गहराई को उजागर किया जा सके।

कविता के क्षेत्र में, 'अश्क' दिल की गहरी भावनाओं का मौन साक्षी है। यह बिना एक शब्द कहे बहुत कुछ कहता है।