Meaning of

औका़त

aukaat • اوقات

स्थिति; मूल्य; समय

status; worth; time

حیثیت; قدر; وقت

Arabic

कैसे बनेगी बात मेरी
सूनी पड़ी है रात मेरी

वो दूसरी दुनिया में ख़ुश है
शर्मिंदा है औक़ात मेरी

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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे

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साल के तीन सौ पैंसठ दिन में एक भी रात नहीं है उस की
वो मुझे छोड़ दे और ख़ुश भी रहे इतनी औक़ात नहीं है उस की

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ये हुनर रब ने मेरी ज़ात में रक्खा हुआ है
अच्छे अच्छो को भी औक़ात में रक्खा हुआ है

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सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी
तुम आए तो इस रात की औक़ात बनेगी

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बहुत सी हैं जगह रहने कि यूँँ तो
मगर औक़ात का अपना मज़ा है

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अपनी हस्ती का भी इंसान को इरफ़ाँ न हुआ
ख़ाक फिर ख़ाक थी औक़ात से आगे न बढ़ी

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ज़ीस्त की खोखली हैहात पे रह जाते हैं
वो जो कमज़र्फ़ हैं, औक़ात पे रह जाते हैं

ओढ़ लेती है शराफ़त की रिदा रोज़ सहर
और इल्ज़ाम फ़क़त रात पे रह जाते हैं

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सहने वाले को गर सब्र आ जाए तो फिर समझो
कहने वालों की औक़ात फ़क़त दो कौड़ी की है

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नहीं दी है किसी को भी इजाज़त दिल में रहने की
रखा औक़ात में सब को वो रहते भी वहीं हैं अब

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कैसे बनेगी बात मेरी
सूनी पड़ी है रात मेरी

वो दूसरी दुनिया में ख़ुश है
शर्मिंदा है औक़ात मेरी

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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे

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'औका़त' मूल रूप से व्यक्ति की स्थिति या मूल्य का माप है। कविता में यह शब्द अक्सर मानवीय गरिमा और सांसारिक स्थिति की क्षणभंगुरता को दर्शाता है।

'औका़त' का उपयोग कवि शक्ति और प्रतिष्ठा की क्षणभंगुरता पर विचार करने के लिए करते हैं। यह शाश्वत और अस्थायी के बीच विरोधाभास प्रस्तुत करता है, अक्सर भौतिक सफलता के वास्तविक मूल्य पर प्रश्न उठाता है।

कविता में 'औका़त' आत्मा के वास्तविक मूल्य को सांसारिक मापदंडों से परे दर्शाने वाला दर्पण बन जाता है।