Meaning of

ब-ख़ुद

b-khud • بخود

स्वयं से परे; आत्मविस्मृत

selfless; lost in oneself

خود سے بے خبر; خود فراموش

Persian

हम तो ख़ुद-ब-ख़ुद ‘अभी’ एक तमसील-ए-हुनर थे
फिर हमारी ही ज़िंदगी क्यूँँ बे–हुनर चली गई

1

Download Image

इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया
ख़ुद-ब-ख़ुद घबरा के क़दमों में ज़माना आ गया

33

Download Image

ख़ुद-ब-ख़ुद शाख़ लचक जाएगी
फल से भरपूर तो हो लेने दो

20

Download Image

सिर झुकाऊँगा सब को भरोसा न था
देख कर मैं तुझे ख़ुद-ब-ख़ुद झुक गया

9

Download Image

हुनर के साथ अगर हौसले निकलते हैं
तो ख़ुद-ब-ख़ुद ही नए रास्ते निकलते हैं

6

Download Image

ख़यालों के सफ़र में संग जाऊँगा
सभी अपने बदलते ढंग जाऊँगा

वहाँ बस आप ख़ुद को रंगते जाओ
यहाँ मैं ख़ुद-ब-ख़ुद ही रंग जाऊँगा

5

Download Image

क़लम भी ख़ुद-ब-ख़ुद हाथों में आके कह रहा है
लिखो जानी, दिवाना मैं तुम्हारा हो गया हूँ

5

Download Image

ख़ुद-ब-ख़ुद ही खिल उठा चेहरा मेरा
प्यार से बहनों ने बाँधी राखी जब

5

Download Image

ख़ुद-ब-ख़ुद मंज़िल तिरे क़दमों में चल कर आएगी
हौसला तेरा अगर शम्स-ओ-क़मर तक जाएगा

3

Download Image

ख़ुद को पहले ढूँढ़ लो पहचान लो फिर
ख़ुद-ब-ख़ुद तुम को ख़ुदा मिल कर रहेगा

1

Download Image

हम तो ख़ुद-ब-ख़ुद ‘अभी’ एक तमसील-ए-हुनर थे
फिर हमारी ही ज़िंदगी क्यूँँ बे–हुनर चली गई

1

Download Image

इश्क़ को जब हुस्न से नज़रें मिलाना आ गया
ख़ुद-ब-ख़ुद घबरा के क़दमों में ज़माना आ गया

33

Download Image

मूल रूप में 'ब-ख़ुद' एक ऐसी अवस्था को दर्शाता है जहाँ व्यक्ति विचारों या भावनाओं में इतना डूब जाता है कि वह स्वयं की चेतना खो देता है। कविता में, यह शब्द आत्मा के अपनी सीमाओं से परे जाने की छवि प्रस्तुत करता है, अक्सर गहरे प्रेम या आध्यात्मिक आनंद के क्षणों में।

कवि अक्सर 'ब-ख़ुद' का उपयोग प्रेमी को अपने प्रिय की दृष्टि में खो जाने के लिए करते हैं। यह एक रहस्यवादी की तंद्रा या एक कलाकार की सृजन में डूबने की स्थिति को भी दर्शा सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'ब-ख़ुद' आत्मा के परे जाने और किसी महानतर में खो जाने की सुंदरता को पकड़ता है।