ख़यालों के सफ़र में संग जाऊँगासभी अपने बदलते ढंग जाऊँगावहाँ बस आप ख़ुद को रंगते जाओयहाँ मैं ख़ुद-ब-ख़ुद ही रंग जाऊँगा— Vijay Anand Mahir