Meaning of

बा-वफ़ा

ba-wafa • با وفا

वफ़ादार; निष्ठावान

faithful; loyal

وفادار; مخلص

Persian

इस तरह से न आज़मा मुझ को
मेहरबाँ है तो दे दुआ मुझ को

एक मुद्दत के बा'द मिल पाया
एक अच्छा सा रास्ता मुझ को

तेरी नफ़रत के साँप ने इक दिन
आँख खुलते ही डस लिया मुझ को

सब की नज़रों में थी हवस क़ायम
कौन अंदर से देखता मुझ को

आज इक दम से बन गया शैतान
कल जो लगता था देवता मुझ को

साथ उस के सफ़र मैं करती हूँ
जो भी मिलता है बा-वफ़ा मुझ को

एक आज़ाद अंदलीब हूँ मैं
ज़िंदा देखे तो कर रिहा मुझ को

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बे-वफ़ा जो हो गए उन को बताना है मुझे
जो न होता बा-वफ़ा बर्बाद ख़ुद को कर लिया

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हम से कोई तअल्लुक़-ए-ख़ातिर तो है उसे
वो यार बा-वफ़ा न सही बे-वफ़ा तो है

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'शाद' ग़ैर-मुमकिन है शिकवा-ए-बुताँ मुझ से
मैं ने जिस से उल्फ़त की उस को बा-वफ़ा पाया

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लफ़्ज़ों के बाज़ीगरों से पूछना ये भी 'बशर'
बा-वफ़ा तब्दील हो कर बे-वफ़ा कैसे हुआ

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बा-वफ़ा या बे-वफ़ाई की कहानी,
इश्क़ में तुम दो मुझे कोई निशानी

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झूठा है सच्चा भी तो हो सकता है
चश्मा है गन्दा भी तो हो सकता है

बारिश केवल बादल की मज़बूरी है?
बादल का ग़ुस्सा भी तो हो सकता है

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चलो माना कि हम ही बे-वफ़ा निकले
मगर तुम तो मिरी जाँ बा-वफ़ा थे ना

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बा-वफ़ा वो है नहीं और बे-वफ़ा कह कैसे दूँ मैं
तो मुनासिब था यही ख़ामोश हो जाऊँ सो चुप हूँ

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मैं जिसे बा वफ़ा समझता था
यार वो शख़्स बे-वफ़ा निकला

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इस तरह से न आज़मा मुझ को
मेहरबाँ है तो दे दुआ मुझ को

एक मुद्दत के बा'द मिल पाया
एक अच्छा सा रास्ता मुझ को

तेरी नफ़रत के साँप ने इक दिन
आँख खुलते ही डस लिया मुझ को

सब की नज़रों में थी हवस क़ायम
कौन अंदर से देखता मुझ को

आज इक दम से बन गया शैतान
कल जो लगता था देवता मुझ को

साथ उस के सफ़र मैं करती हूँ
जो भी मिलता है बा-वफ़ा मुझ को

एक आज़ाद अंदलीब हूँ मैं
ज़िंदा देखे तो कर रिहा मुझ को

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बे-वफ़ा जो हो गए उन को बताना है मुझे
जो न होता बा-वफ़ा बर्बाद ख़ुद को कर लिया

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'बा-वफ़ा' शब्द अटल निष्ठा और स्थिरता की भावना को जागृत करता है। कविता में, यह सच्ची भक्ति के आदर्श का प्रतीक है, चाहे वह प्रेम में हो या मित्रता में, जहाँ किसी की वफ़ादारी को समय और परिस्थिति द्वारा परखा जाता है।

कवि अक्सर 'बा-वफ़ा' का उपयोग विश्वासघात या बेवफ़ाई के विपरीत करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो प्रिय को शुद्धता और विश्वास की आदर्श स्थिति में उठाता है। इस शब्द का उपयोग दुनिया में ऐसी वफ़ादारी की दुर्लभता पर शोक व्यक्त करने के लिए भी किया जा सकता है।

कविता की दुनिया में, 'बा-वफ़ा' आशा और आदर्शवाद का एक प्रकाशस्तंभ बना रहता है, उन गुणों की याद दिलाता है जो मानव हृदयों को बांधते हैं।