Meaning of

ब-ज़ाहिर

ba-zaahir • بظاہر

प्रकट रूप से; बाहरी रूप से

apparently; outwardly

ظاہری طور پر; بظاہر

Arabic

हाल अब भी वही है जो था
हम ब-ज़ाहिर कमाने लगे

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पा ए उम्मीद प रक्खे हुए सर हैं हम लोग
हैं न होने के बराबर ही मगर हैं हम लोग

तू ने बरता ही नहीं ठीक से हम को ऐ दोस्त
ऐब लगते हैं ब-ज़ाहिर प हुनर हैं हम लोग

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ब-ज़ाहिर लाख गर्द आलूद कर दे वक़्त की आँधी
नुमायाँ दस्तरस दिल में तिरी तस्वीर होती है

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ब-ज़ाहिर पारसाओं का लबादा ओढ़ने वालों
नहीं तुम तोड़ पाओ गे वतन को तोड़ने वालों

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इस आँख से दो अश्क छलक भी गए तो क्या
रोना तो ब-ज़ाहिर मिरा किरदार नहीं है

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बज़ाहिर हमीं अश्क से सींचते हैं
हुआ कब हरा इक शजर ज़िन्दगी भर

मिरा इश्क़ मुझ
में सलामत पड़ा है
मुझे भी न होगी ख़बर ज़िन्दगी भर

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हाल अब भी वही है जो था
हम ब-ज़ाहिर कमाने लगे

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पा ए उम्मीद प रक्खे हुए सर हैं हम लोग
हैं न होने के बराबर ही मगर हैं हम लोग

तू ने बरता ही नहीं ठीक से हम को ऐ दोस्त
ऐब लगते हैं ब-ज़ाहिर प हुनर हैं हम लोग

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'ब-ज़ाहिर' शब्द उस सतह का वर्णन करता है जो आँखों को दिखाई देती है। कविता में, यह अक्सर दिखावे और वास्तविकता के बीच के अंतर को दर्शाता है, पाठक को सतह से परे देखने के लिए आमंत्रित करता है।

'ब-ज़ाहिर' का उपयोग कवि छल और छिपे हुए सत्य के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह देखी गई चीज़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने और सतह के नीचे की परतों में गहराई से जाने का साधन है।

कविता में, 'ब-ज़ाहिर' सत्य और माया की प्रकृति पर गहरे चिंतन के लिए आमंत्रित करता है। यह हमें याद दिलाता है कि जो हम देखते हैं, वह हमेशा वास्तविक नहीं होता।