Meaning of

बौर

baur • بور

फूल; नशा

blossom; intoxication

پھول; نشہ

Sanskrit

भले ही सैकड़ों मजबूरियाँ हों बेवफ़ाई की
मगर तुम वज्ह मत बनना किसी सूनी कलाई की

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तुम्हारे बा'द ये दुख भी तो सहना पड़ रहा है
किसी के साथ मजबूरी में रहना पड़ रहा है

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साथ चलते जा रहे हैं पास आ सकते नहीं
इक नदी के दो किनारों को मिला सकते नहीं

उस की भी मजबूरियाँ हैं मेरी भी मजबूरियाँ
रोज़ मिलते हैं मगर घर में बता सकते नहीं

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कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी
यूँँ कोई बे-वफ़ा नहीं होता

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बेवजह मुझ सेे फिर ख़फ़ा क्यूँ है
ये कहानी ही हर दफ़ा क्यूँ है

कुछ भी मजबूरी तो नहीं दिखती
मैं क्या जानूं वो बे-वफ़ा क्यूँ है

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हो गया ग्यारह का तो दिखने लगीं मजबूरियाँ
बीस का होते ही अपनी नौजवानी छोड़ दी

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मन में एक इरादा होता है ताबिश
राजा पहले प्यादा होता है ताबिश

मानता हूँ मजबूरियाँ थीं कुछ दिक्कत थी
पर वा'दा तो वा'दा होता है ताबिश

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इंसान अपने आप में मजबूर है बहुत
कोई नहीं है बे-वफ़ा अफ़्सोस मत करो

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चले जाओ भी अब जी लेंगे पर
सच कहो मजबूरी है क्या

मुझे ये कहानी कुछ और लिखनी थी
तुम्हारे हिसाब से पूरी है क्या

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इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ
वगरना यूँँ तो किसी की नहीं सुनी मैं ने

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भले ही सैकड़ों मजबूरियाँ हों बेवफ़ाई की
मगर तुम वज्ह मत बनना किसी सूनी कलाई की

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तुम्हारे बा'द ये दुख भी तो सहना पड़ रहा है
किसी के साथ मजबूरी में रहना पड़ रहा है

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मूल रूप में 'बौर' फूलों के खिलने को दर्शाता है, जो प्रकृति के नवीनीकरण और सुंदरता का प्रतीक है। कविता में, यह वसंत के मोहक आकर्षण, हवा में भरने वाली मादक सुगंध, और आत्मा को मोहित करने वाली क्षणिक सुंदरता को पकड़ता है।

'बौर' का उपयोग कवि अक्सर वसंत की ताजगी को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह नए आरंभ और सुंदरता के मादक प्रभाव का प्रतीक है। यह सर्दी की बंजरता के विपरीत जीवन के चक्र को उजागर करता है।

'बौर' जीवन की क्षणभंगुर सुंदरता का सार पकड़ता है, जो प्रकृति के अनंत नृत्य की याद दिलाता है।