Meaning of

बज़्म-ए-याराँ

bazm-e-yaaraan • پھری

मित्रों की सभा; साथियों की महफ़िल

gathering of friends; assembly of companions

دوستوں کی محفل; ساتھیوں کی مجلس

Persian

दिन गुज़रता है बज़्म-ए-याराँ में
रात तन्हाई में बिताता हूँ

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हमीं को क़ातिल कहेगी दुनिया हमारा ही क़त्ल-ए-आम होगा
हमीं कुएँ खोदते फिरेंगे हमीं पे पानी हराम होगा

अगर यही ज़ेहनियत रही तो मुझे ये डर है कि इस सदी में
न कोई अब्दुल हमीद होगा न कोई अब्दुल कलाम होगा

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और फिर लोग यही कहते फिरेंगे इक दिन
यार कल ही तो मेरी बात हुई थी उस सेे

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तुझी को देखूँगा जब तक हैं बरक़रार आँखें
मिरी नज़र न फिरेगी तिरी नज़र की तरह

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चाँद को भी देखना है चाँद की तौहीन है ये
एक ही है चाँद किस किस को नज़र आता फिरेगा

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कब तक शदीद दर्द उठाए फिरेंगे हम
अब ख़ुशियों के कपाट को खुल जाना चाहिए

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दिन गुज़रता है बज़्म-ए-याराँ में
रात तन्हाई में बिताता हूँ

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हमीं को क़ातिल कहेगी दुनिया हमारा ही क़त्ल-ए-आम होगा
हमीं कुएँ खोदते फिरेंगे हमीं पे पानी हराम होगा

अगर यही ज़ेहनियत रही तो मुझे ये डर है कि इस सदी में
न कोई अब्दुल हमीद होगा न कोई अब्दुल कलाम होगा

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'बज़्म-ए-याराँ' उस सभा की गर्मजोशी और मित्रता को दर्शाता है जहाँ दिल और दिमाग मिलते हैं। यह हंसी, साझा कहानियों और साथीपन की कोमल चमक से भरी जगह का सुझाव देता है।

कवि 'बज़्म-ए-याराँ' का उपयोग आनंदमय पुनर्मिलनों के दृश्य चित्रित करने या प्रिय मित्रों के साथ बिताए समय को याद करने के लिए करते हैं। यह अक्सर अकेलेपन के साथ साझा क्षणों की समृद्धि का विरोधाभास करता है।

'बज़्म-ए-याराँ' मित्रता और साझा खुशी की स्थायी शक्ति का प्रमाण है।