Meaning of

बे-ख़याल

be-khayaal • بے خیال

अनमना; विचारों में खोया

absent-minded; lost in thought

بے دھیان; خیالات میں گم

Persian

तेरे ख़याल में थे गुम अपना ख़याल किस को था
ऐसी भी बे-ख़याली का यार मलाल किस को था

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बात करते हुए बे-ख़याली में ज़ुल्फ़ें खुली छोड़ दी
हम निहत्थों पे उस ने ये कैसी बलाएँ खुली छोड़ दी

साथ जब तक रहे एक लम्हे को भी रब्त टूटा नहीं
उस ने आँखें अगर बंद कर ली तो बाँहें खुले छोड़ दी

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मैं बे-ख़याल कभी धूप में निकल आऊँ
तो कुछ सहाब मिरे साथ साथ चलते हैं

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बे वजह ही नहीं मुझ को भाती है वो
दोस्तों चाय अच्छी बनाती है वो

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क्यूँँ रोऊँ बे वजह मैं तुझे याद क्यूँँ करूँँ
ख़ुद को तेरे फिराक़ में बर्बाद क्यूँँ करूँँ

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बद-हवा सेी है बे-ख़याली है
क्या ये हालत भी कोई हालत है

ज़िंदगी से है जंग शाम-ओ-सहर
मौत से शिकवा है शिकायत है

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हाथ झाड़े थे बे-ख़याली में
गिर गए यार आस्तीनों से

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तेरे ख़याल में थे गुम अपना ख़याल किस को था
ऐसी भी बे-ख़याली का यार मलाल किस को था

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बात करते हुए बे-ख़याली में ज़ुल्फ़ें खुली छोड़ दी
हम निहत्थों पे उस ने ये कैसी बलाएँ खुली छोड़ दी

साथ जब तक रहे एक लम्हे को भी रब्त टूटा नहीं
उस ने आँखें अगर बंद कर ली तो बाँहें खुले छोड़ दी

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'बे-ख़याल' शब्द वर्तमान क्षण से दूर बहने की स्थिति का सुझाव देता है, अपने विचारों में खोया हुआ। कविता में, यह आत्मनिरीक्षण की भावना और वास्तविकता और कल्पना के बीच नाजुक संतुलन को पकड़ता है।

कवि 'बे-ख़याल' का उपयोग ऐसे पात्रों को चित्रित करने के लिए करते हैं जो स्वप्नद्रष्टा हैं, अक्सर सांसारिक और अलौकिक के बीच फंसे होते हैं। यह गहन चिंतन और रचनात्मकता की अनुमति देने वाली स्थिति है।

कविता के क्षेत्र में, 'बे-ख़याल' हमें अपने मन के परिदृश्यों में भटकने के लिए आमंत्रित करता है, जहाँ वास्तविकता और सपने आपस में मिलते हैं।