Meaning of

बे-नक़ाब

be-naqaab • بے نقاب

अनावृत; प्रकट; उजागर

unveiled; exposed; revealed

بے نقاب; ظاہر; آشکار

Persian

कल रास्ते में मुझ को मिली थी जो बे नक़ाब
उस ने नज़र झुका ली तो अच्छा लगा मुझे

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तसव्वुर में भी अब वो बे-नक़ाब आते नहीं मुझ तक
क़यामत आ चुकी है लोग कहते हैं शबाब आया

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ख़ाक बस्तियों में घर रेत के बनाओगे
रोज़ रोज़ ऐसे ही ख़ूब चोट खाओगे

सोचते तो हैं हम भी छत से कूद जाएँ अब
फिर ख़याल आता है तुम कहाँ पे जाओगे

जो हमारे हो कर भी हर किसी को देखोगे
बे-वफ़ा की गिनती में यार आ ही जाओगे

बे-नक़ाब होकर के हम निकल तो आएँगे
हो गया कहीं कुछ भी हमपे टिन-टिनाओगे

शब के आठ बजते ही तुम कहाँ पे जाते हो
कोई पूछ बैठा फिर बोलो क्या बताओगे

जब रक़ीब बनकर ही कुछ नहीं हुआ तुम सेे
तुम हबीब बनकर क्या बस्तियाँ जलाओगे

जब नज़र झुकाओगे बात बन ही जाएगी
प्यार से जो बोलेंगे तुम भी मान जाओगे
इश्क़ का मुहब्बत का जब बुख़ार आएगा
वक़्त पर दवा लेना ख़ुद ही भूल जाओगे

जब कभी भी तन्हाई नोच कर के खाएगी
मेरा नाम लिख कर तुम हाथ पर मिटाओगे

दास्ताँ मोहब्बत की एक बार सुन लोगे
मेरा नाम गीतों में तुम भी गुन-गुनाओगे

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वो कल मिली थी हम को जो रस्ते में बे नक़ाब
हम ने नज़र झुका ली तो अच्छा लगा उसे

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एक एक कर के पहले बे-नक़ाब कर दिया
रौंद डाले फिर सभी नक़ाब ठोकरों तले

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हुस्न को बे-नक़ाब देखा है
इश्क़ तो बे-हिसाब होना था

तेरी नज़रों का दोष कोई नहीं
हम को यूँँ भी ख़राब होना था

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कल रास्ते में मुझ को मिली थी जो बे नक़ाब
उस ने नज़र झुका ली तो अच्छा लगा मुझे

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तसव्वुर में भी अब वो बे-नक़ाब आते नहीं मुझ तक
क़यामत आ चुकी है लोग कहते हैं शबाब आया

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बे-नक़ाब बाधाओं को हटाने और सत्य के प्रकटीकरण का सुझाव देता है। कविता में, यह अक्सर उस क्षण का संकेत देता है जब छिपी हुई भावनाएँ या सत्य उजागर होते हैं, जिससे एक शक्तिशाली प्रभाव उत्पन्न होता है।

कवि 'बे-नक़ाब' का उपयोग प्रकटीकरण और भेद्यता के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह सत्य का क्षण है, जहाँ मुखौटे गिर जाते हैं और सार स्पष्ट हो जाता है।

बे-नक़ाब आत्मा के गहरे सत्य का अनावरण है। यह काव्यात्मक क्षण है जहाँ कच्ची ईमानदारी और गहरी स्पष्टता होती है।