Meaning of

बे-रुख़

be-rukh • بے رخ

उदासीन; अलग-थलग; अनुत्तरदायी

indifferent; aloof; unresponsive

بے پرواہ; الگ تھلگ; غیر جوابی

Persian

तेरी अब याद से साॅंसें चलेंगी
अमाॅं आसान कब है बेरुखी भी

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तुम्हारी बेरुख़ी के ठीक पीछे
हमारा इश्क़ भी तो पल रहा है

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तीसरी दफ़ा हम सब कुछ समझ गए जानी
तीसरी दफा भी तुम ने कहा नहीं कुछ भी

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तुम्हारी बेरुख़ी अब सह नहीं पाते
हमें तुम मार दो अब जान से जानाँ

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बेबसी की ज़रूरत नहीं है
बे-रुख़ी की ज़रूरत नहीं है

मैं करूँँगा मुहब्बत किसी से
अब उसी की ज़रूरत नहीं है

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अब तअल्लुक़ को तअल्लुक़ से मिलाना कैसा
हो गए ख़ाक तो फिर लौट के आना कैसा

तुम को मिलना ही नहीं था तो बता सकते थे
बे-रुख़ी ये, ये तकल्लुफ़, ये बहाना कैसा

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माशूक़ की बे-रुख़ी तो ले लेती है जाँ आशिक़ की भी
लाचार मोहब्बत में आशिक़ की जाँ की क़ीमत क्या है

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यूँँ तो वो शख़्स बिल्कुल बे-गुनह है
ज़माने की मगर उस पे निगह है

हमारे दरमियाँ जो दूरियाँ हैं
यक़ीनन तीसरी कोई वजह है

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रेज़ा-रेज़ा हो गए हैं और क्या
अपने धुन में खो गए हैं और क्या

कह रहा है बे-रुख़ी करते हैं हम
तेरे जैसे हो गए हैं और क्या

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तेरी बेरुखी के सबब एक डर है
किसी दिन नज़र भी न आया तू तो फिर

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तेरी अब याद से साॅंसें चलेंगी
अमाॅं आसान कब है बेरुखी भी

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तुम्हारी बेरुख़ी के ठीक पीछे
हमारा इश्क़ भी तो पल रहा है

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बे-रुख़ शब्द भावनात्मक दूरी की भावना को व्यक्त करता है, एक ठंडापन जो सुरक्षात्मक और अलगावकारी दोनों हो सकता है। कविता में, यह अक्सर मानव संबंधों की जटिलताओं को दर्शाता है जहां गर्मजोशी अनुपस्थित होती है।

कवि 'बे-रुख़' का उपयोग अलगाव और भावनात्मक अलगाव के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह स्नेह के शब्दों के विपरीत, संबंध की अनुपस्थिति को उजागर करता है।

कविता में, 'बे-रुख़' एक दर्पण है जो उस शून्य को दर्शाता है जहां कभी गर्मजोशी थी।