Meaning of

बेरुख़

berukh • بےرخ

उदासीन; भावशून्य

indifferent; unfeeling

بے پروا; بے حس

Persian

तेरी निगाहें मोहब्बत है बेरुख़ी की तरह
हम एक शहर में रहते हैं अजनबी की तरह

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तुम्हारी बेरुख़ी के ठीक पीछे
हमारा इश्क़ भी तो पल रहा है

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तुम्हारी बेरुख़ी अब सह नहीं पाते
हमें तुम मार दो अब जान से जानाँ

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ये जो तुम कर रही हो मुझ सेे बेरूख़ी-सी बातें
बड़ा दुख होगा तुम्हें तोड़ कर हम सेे हसीं नातें

फिर न कहना के बदल गया हूँ मैं मोहब्बत में
मैं कब तक सहूँगा आख़िर तेरी तल्ख़-सी बातें

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तेरी बेरुखी के सबब एक डर है
किसी दिन नज़र भी न आया तू तो फिर

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किसी की याद में रो रो के रातें तुम गुज़ारोगे
बड़ी ही बेरुख़ी से ख़ुद को शीशे में निहारोगे

हमारे दिल के ऊपर जो सितम तुम ने किए हैं जाँ
उन्हें तुम याद कर के बे-वफ़ा ख़ुद को पुकारोगे

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बेरुख़ी अपनी छुपाने के लिए
हँस रहे हैं हम दिखाने के लिए

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ख़ुद को भी शर्म आए मुहब्बत के नाम पर
थी इस क़दर की बेरुख़ी सब कुछ बदल गया

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तेरी बेरुख़ी ने किया है जो आतिशपा
मुझे मौत आए तेरी याद आने पर

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तेरी अब याद से साॅंसें चलेंगी
अमाॅं आसान कब है बेरुखी भी

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तेरी निगाहें मोहब्बत है बेरुख़ी की तरह
हम एक शहर में रहते हैं अजनबी की तरह

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तुम्हारी बेरुख़ी के ठीक पीछे
हमारा इश्क़ भी तो पल रहा है

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बेरुख़ शब्द एक भावनात्मक दूरी का आभास कराता है, एक ठंडापन जो दिल को ठंडा कर सकता है। कविता में, यह अक्सर एकतरफा प्रेम के दर्द या भाग्य की कठोरता को दर्शाता है। इस शब्द की सरलता उस भावना की गहराई को छुपाती है, जो एक मुड़े हुए दिल का सार पकड़ती है।

कवि 'बेरुख़' का उपयोग अस्वीकृति और भावनात्मक अलगाव के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह गर्मजोशी और स्नेह के शब्दों के विपरीत है, भावनात्मक उपेक्षा की कठोरता को उजागर करता है। अक्सर, इसका उपयोग प्रेमी के ठंडे व्यवहार या दुनिया की उदासीनता का वर्णन करने के लिए किया जाता है।

'बेरुख़' अपनी शांत सरलता में दिल के मौन दुखों की गहराई को बयां करता है। यह एक ऐसा शब्द है जो चाहत और खोने के बीच की जगहों में गूंजता है।