किसी की याद में रो रो के रातें तुम गुज़ारोगेबड़ी ही बेरुख़ी से ख़ुद को शीशे में निहारोगेहमारे दिल के ऊपर जो सितम तुम ने किए हैं जाँउन्हें तुम याद कर के बे-वफ़ा ख़ुद को पुकारोगे— SAAGAR SINGH RAJPUT