Meaning of

भृंग

bhring • بھنگ

मधुमक्खी; भौंरा

bee; bumblebee

شہد کی مکھی; بھنورا

Sanskrit

होली गई खेली सदा ही रंग से
सब को बड़ा आया मज़ा भी भंग से

जाने कहाँ उड़ कर गए वो दिन सभी
हो दर्द भी जीते ख़ुशी के संग से

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दुनिया को ज़हर पीके बचाओ तो बात है
बस भांग पीके कोई भी शंकर नहीं हुआ

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वो दूर मुझ सेे जब हुआ रो कर नहीं हुआ
तो मैं भी इंतिज़ार में पत्थर नहीं हुआ

दुनिया को ज़हर पी के बचाओ तो बात है
बस भांग पी के कोई भी शंकर नहीं हुआ

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ये मख़मली गद्दे तो तुझ को ही मुबारक हों
ऐ दोस्त मुझे बस माँ की गोद ही काफ़ी है

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खिला कर भंग की गुजिया समा रंगीन कर दो तुम
बड़ी मुश्क़िल से तो हो पाया है दीदार होली में

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तन पर रंग चढ़ाती होली
या फिर भंग पिलाती होली

होली सारे भेद मिटाए
सम रस ढंग बढ़ाती होली

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किसी को खेलनी है साथ तेरे रंग की होली
कहीं पर खेलते हैं साथ तेरे भंग की होली

नहीं मैं जानता खेलूँ कहाँ किस ढंग की होली
मुझे है चाह खेलूँ संग तेरे शंग की होली

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होली गई खेली सदा ही रंग से
सब को बड़ा आया मज़ा भी भंग से

जाने कहाँ उड़ कर गए वो दिन सभी
हो दर्द भी जीते ख़ुशी के संग से

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दुनिया को ज़हर पीके बचाओ तो बात है
बस भांग पीके कोई भी शंकर नहीं हुआ

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अपने मूल अर्थ में, 'भृंग' मधुमक्खी को संदर्भित करता है, जो प्रकृति का एक जीव है, अपनी मेहनत और शहद के निर्माण में भूमिका के लिए जाना जाता है। कविता में, मधुमक्खी अक्सर प्रेमी का प्रतीक होती है, जो फूल की मिठास की ओर अनिवार्य रूप से खिंचता है।

'भृंग' का उपयोग कवि अक्सर प्रकृति की समरसता को दर्शाने के लिए करते हैं। यह प्रेमी के बेचैन हृदय का प्रतीक हो सकता है। फूल से फूल तक मधुमक्खी की यात्रा को प्रेमी की सौंदर्य और संतोष की खोज के समान माना जाता है।

मधुमक्खी के नृत्य में, कवि प्रेम और लालसा के शाश्वत नृत्य को पाते हैं। 'भृंग' खोज और इच्छा के सार को पकड़ता है।