Meaning of

बुत

but • بت

मूर्ति; प्रतिमा; प्रिय

idol; statue; beloved

بت; مجسمہ; محبوب

Persian

अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो
तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो

मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ
मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो

295

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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो
तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो

ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा
ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो

1283

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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई
लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं

841

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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है
अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है

किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया
ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है

569

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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई
देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ

553

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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है

473

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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना
तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है

371

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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था
ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी

362

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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा

हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में
अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा

341

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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं
तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं

300

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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो
तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो

मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ
मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो

295

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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो
तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो

ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा
ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो

1283

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‘बुत’ शब्द में पूजा और श्रद्धा का भार होता है। काव्यात्मक अभिव्यक्तियों में, यह अक्सर प्रिय का प्रतीक होता है, जिसे सौंदर्य और पूर्णता की मूर्ति के रूप में देखा जाता है, जो हृदय की भक्ति को पकड़ता है।

कवि ‘बुत’ का उपयोग अप्राप्य सौंदर्य या गहरे स्नेह के वस्तु की छवि को उभारने के लिए करते हैं। यह आध्यात्मिक भक्ति और सांसारिक प्रेम के बीच संघर्ष का भी प्रतिनिधित्व कर सकता है, जो शास्त्रीय कविता में एक आवर्ती विषय है।

कविता में, ‘बुत’ अपने शाब्दिक अर्थ से परे जाकर आदर्श प्रेम और सौंदर्य का प्रतीक बन जाता है। यह पाठक को भक्ति और इच्छा की प्रकृति पर विचार करने के लिए आमंत्रित करता है।