
अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो
तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो
मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ
मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
— Tehzeeb Hafi
Other sher from the same pen
Shers of mood off.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling